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अक्सर लोग कार की सर्विस पूरी तरह सर्विस सेंटर पर छोड़ देते हैं और जो कहा जाता है, वही करा लेते हैं. जबकि सही तरीका यह है कि कार की मेंटेनेंस समझदारी से की जाए. हर पार्ट को बदलने का एक तय समय और किलोमीटर लिमिट होती है, जिसे जानना जरूरी है.
इंजन ऑयल का सही समय

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इंजन ऑयल कार के इंजन की लाइफलाइन होता है. अगर आप मिनरल ऑयल इस्तेमाल करते हैं, तो इसे हर 5,000 से 10,000 किलोमीटर या करीब 6 महीने में बदलना बेहतर रहता है. वहीं सिंथेटिक ऑयल को 10,000 किलोमीटर या लगभग एक साल तक चलाया जा सकता है. नया ऑयल डालते समय पुराना ऑयल पूरी तरह निकालना जरूरी है.
एयर फिल्टर की भूमिका

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एयर फिल्टर इंजन तक साफ हवा पहुंचाने का काम करता है. अगर आप ज्यादा धूल या प्रदूषण वाले इलाके में ड्राइव करते हैं, तो इसे हर 6 महीने में बदलना सही रहता है. साफ वातावरण में साल में एक बार बदलना भी काफी हो सकता है.
टायर रोटेशन क्यों जरूरी है

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टायर रोटेशन का मतलब चारों टायरों की पोजीशन बदलना होता है, ताकि सभी टायर बराबर घिसें. इसे हर 8,000 से 10,000 किलोमीटर पर करवाना चाहिए. इससे टायर की लाइफ बढ़ती है और गाड़ी संतुलित चलती है.
गियर ऑयल कब बदलें

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गियर ऑयल को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं होती. आमतौर पर 50,000 से 60,000 किलोमीटर या 4-5 साल बाद इसे बदलना ठीक रहता है. इससे पहले इसे बदलना जरूरी नहीं होता, जब तक कोई समस्या न हो.
ब्रेक पैड्स पर रखें नजर

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शहर में ज्यादा ड्राइव करने से ब्रेक पैड्स जल्दी घिसते हैं. इसलिए इन्हें हर 10,000 से 20,000 किलोमीटर के बीच जरूर चेक कराएं. जरूरत पड़ने पर तुरंत बदलवाना बेहतर होता है.
कूलेंट और स्पार्क प्लग का समय

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कूलेंट और स्पार्क प्लग जैसे जरूरी पार्ट्स को लगभग 30,000 से 40,000 किलोमीटर के बाद बदलना सही माना जाता है. इससे इंजन की परफॉर्मेंस बनी रहती है.
कार की हालत पर रखें ध्यान

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सबसे जरूरी है कि आप अपनी कार की कंडीशन को समझें और उसके मैनुअल के अनुसार मेंटेनेंस करें. इससे आप बेवजह के खर्च से बच सकते हैं और कार लंबे समय तक अच्छी हालत में रहती है.