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8th Pay Commission: केंद्र सरकार के करीब 1.19 करोड़ कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए भले ही 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू माना जा रहा है, लेकिन आयोग को अपनी सिफारिशें देने में करीब 18 महीने लग सकते हैं. इस दौरान कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत ही वेतन और डीए मिलता रहेगा. जानें, DA मर्ज पर कर्मचारी संगठनों का नया प्रस्ताव, सरकार के सामने रखी बड़ी मांग

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वर्तमान में डीए 58 प्रतिशत है और जनवरी 2026 से इसमें और बढ़ोतरी होनी है. यदि नए वेतन आयोग के लागू होने में देरी होती है तो डीए 2027–28 तक 74 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि 50 प्रतिशत डीए बेसिक में मर्ज किया जाए और शेष डीए जारी रखा जाए, ताकि महंगाई के असर को कम किया जा सके. अब फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा.

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पुराने अनुभवों को देखें तो नया वेतन आयोग लागू होने तक कर्मचारियों को मौजूदा वेतन आयोग के तहत ही सैलरी मिलती है. जब आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तब बीच की पूरी अवधि का एरियर दिया जाता है. इसमें बढ़ा हुआ बेसिक पे, भत्ते और रिटायरमेंट से जुड़े लाभ शामिल होते हैं. यह एरियर नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर तय किया जाता है, जिससे कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की उम्मीद रहती है.

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डीए को लेकर चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि नए वेतन आयोग के लागू होते ही मौजूदा डीए को बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाता है और डीए की गणना शून्य से शुरू होती है. फिलहाल 1 जुलाई 2025 से डीए 58 प्रतिशत हो चुका है और अगली बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से होनी है. मौजूदा ट्रेंड के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग 2027–28 तक लागू होता है, तो डीए 74 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

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इस बीच कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा है. ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉयीज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि अगर डीए 74 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो सरकार पूरा डीए खत्म करने के बजाय 50 प्रतिशत डीए को बेसिक में मर्ज करे और शेष 24 प्रतिशत डीए को जारी रखे. इससे बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आय पर अचानक पड़ने वाला असर कम होगा.

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हालांकि सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है, लेकिन आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने में करीब 18 महीने का समय लग सकता है. कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर 2.64 रखने और न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार की यूनिट तीन से बढ़ाकर पांच करने की भी मांग की है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार पारंपरिक फॉर्मूले पर चलती है या कर्मचारियों को राहत देने के लिए कोई नया रास्ता अपनाती है.