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Opinion

‘सेवानिवृति के बाद अपनी जगह तलाश रहे PM मोदी’: सामना संपादकीय

शिवसेना यूबीटी ने अपने मुखपत्र सामना में पीएम मोदी के नागपुर दौरे को लेकर निशाना साधा है। सामना में लिखा है कि पीएम मोदी 75 साल की उम्र पूरी करने के बाद अपने लिए संघ में अपनी जगह की तलाश कर रहे हैं।

Author Reported By : Rahul Pandey Edited By : Rakesh Choudhary Updated: Apr 1, 2025 09:30
PM Modi RSS Headquarter Visit
PM Modi RSS Headquarter Visit

मोदी के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य से हुई। वे संघ के प्रचारक के तौर पर काम कर रहे थे। संघ के यही प्रचारक बाद में 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। उसके बाद के दस वर्षों में मोदी कभी भी नागपुर में संघ मुख्यालय के आसपास नहीं गए, लेकिन कल गुढी पाडवा के दिन मोदी नागपुर में संघ मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने कुछ कार्यक्रमों में भाग लिया। अहम बात यह कि उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत से बंद कमरे में चर्चा की। इसलिए नई चर्चाओं को पंख लग गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने लंबे समय बाद संघ की तारीफ की

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को संघ का स्वयंसेवक घोषित किया और लंबे समय बाद संघ की तारीफ की है। मोदी नागपुर गए और संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के स्मारक के दर्शन किए। मोदी ने बाद में कहा, ‘देश इतने वर्षों तक मानसिक गुलामी में था। अब वह इससे बाहर आ रहा है। युवा पीढ़ी में यह भावना है कि हम देश के लिए जीना चाहते हैं। डॉ. हेडगेवार और गोलवलकर गुरुजी की प्रेरणा से ही विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा। मोदी ने यह कहा और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन जब मोदी कहते हैं कि संघ ने मानसिक गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं तो उनका वास्तव में क्या मतलब है? संघ सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में तो आगे है ही, पिछले दस वर्षों में संघ ने राजनीतिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

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आज मोदी सत्ता में हैं तो इसमें संघ के स्वयंसेवकों का त्याग और परिश्रम सबसे अधिक है। पिछले 10 सालों में मोदी ने देश में ‘मोदी की जय’ बोलने वाले अंधभक्तों की बाढ़ ला दी है। यह मानसिक गुलामी है। संघ इस मानसिक गुलामी की बेड़ियां तोड़ना चाहता है और शायद यही संघ मुख्यालय में सरसंघचालक और मोदी मुलाकात का प्रयोजन रहा हो।

संघ भाजपा का मातृ संगठन

ऐसा लगता है संघ भाजपा का मातृ संगठन है। 1978 में इसी मातृ संगठन विवाद के कारण जनता पार्टी की सरकार गिर गई। मोरारजी मंत्रिमंडल में होते हुए भी वाजपेयी-आडवाणी और अन्य नेता अपने मातृ संगठन, यानी रा. स्व. संघ के साथ संवाद और संबंध तोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। इन सभी ने सत्ता छोड़ दी, लेकिन मातृ संस्था की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आने दी। लेकिन अब संघ को नोक पर रखने का काम किया जा रहा है। जेपी नड्डा जैसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहना शुरू कर दिया कि ‘हमें संघ की आवश्यकता नहीं है। हम उनके बिना 400 पार कर सकते हैं’ और संघ ने लोकसभा चुनाव में मोदी की तूफानी हवा को 240 पर रोक दिया। नड्डा अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल कब का खत्म हो चुका है। बावजूद, भाजपा अब तक अपना नया अध्यक्ष नहीं चुन पाई है।

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संघ अपना अध्यक्ष चाहता है

जाहिर है कि संघ ने सर्वशक्तिमान मोदी और अमित शाह जैसे भाजपा के बाहुबलियों को नया अध्यक्ष नियुक्त करने से रोक दिया है। संघ सीधे तौर पर अपने आदमी को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहता है। अब उनका आदमी कौन है और क्या वह आदमी मोदी-शाह को पसंद आएगा? भाजपा इसी चक्रव्यूह में फंस गई है। नितिन गडकरी 2010-2013 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। परदे के पीछे से गडकरी को अध्यक्ष पद का दूसरा ‘टर्म’ मिलने से रोकने के लिए उनके खिलाफ साजिशें रची गई।

गडकरी के खिलाफ साजिश रची गई

गडकरी को रोकने के लिए उनके ‘पूर्ति’ औद्योगिक समूह पर छापे मारे गए और उन्हें बदनाम किया गया। यह अरुण जेटली के जरिए किया गया और साजिश का केंद्र गुजरात ही था। अगर गडकरी दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते तो नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में उभर नहीं पाते और आज जो राजनीति हम देख रहे हैं वह देश में देखने को नहीं मिलती। गडकरी सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा नियुक्त किए गए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, लेकिन उन्हें ही हटा दिया गया। ये टीस आज भी संघ के दिल में है।

PM मोदी के आदर्श वाक्य पर साधा निशाना

इसलिए इस बार भाजपा अध्यक्ष शत-प्रतिशत नागपुर से होगा। संघ अपना अध्यक्ष बनाएगा तो मोदी-शाह के दिल में यह टीस चुभेगी। तो क्या इसी की वजह से मोदी संघ मुख्यालय आए थे? मोदी ने खुद नियम बनाया है कि किसी को 75 साल की उम्र तक ही राजनीतिक पद पर रहना चाहिए। इसीलिए मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कई बुजुर्गों को दरकिनार कर दिया। ‘नियम तो नियम हैं, इनसे कोई नहीं बच पाएगा’ मोदी का आदर्श वाक्य है। सितंबर महीने में मोदी 75 साल पूरे कर लेंगे और अपने ही नियमों के मुताबिक रिटायर हो जाएंगे।

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सेवानिवृति के बाद अपनी जगह तलाश रहे PM मोदी

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, मोदी शायद संघ मुख्यालय में इस बात पर परामर्श करने गए होंगे कि क्या उन्हें फिर से संघ स्वयंसेवक के रूप में काम करना चाहिए या संघ के किसी प्रोजेक्ट की कमान संभालनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी की विदाई का समय आ गया है। मोदी भगवान का अवतार हैं। इसलिए भले ही उनके अंधभक्त कहेंगे कि वे रिटायर होने के लिए बाध्य नहीं हैं, लेकिन उन्हें हिंदू धर्म का ठीक से अध्ययन करना चाहिए। मोदी ने नागपुर में ‘राम से राष्ट्र’ का मंत्र दिया। ‘राम-कृष्ण के बाद क्या दुनिया रुक गई?’ यही हिंदू धर्म है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्तों का संगठन है। हिंदू धर्म के प्रति उनकी भावनाएं प्रबल हैं। पिछले दस सालों में संघ की दिशा भटकाने की कोशिश की गई। आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक जागरूकता से बने इस संगठन को दस वर्षों में मानसिक गुलामी की बेड़ियों में जकड़ने की कोशिश की गई। यदि वे बंधन टूटने वाले हैं तो स्वागत है!

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Rakesh Choudhary

Reported By

Rahul Pandey

First published on: Apr 01, 2025 09:21 AM

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