कोलकाता, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India – GSI) को नया नेतृत्व मिल गया है. दिनेश विट्ठलराव गनवीर ने रविवार को संगठन के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया. तीन दशक से अधिक समय तक भूवैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और प्रशासनिक क्षेत्र में अनुभव रखने वाले गनवीर के नेतृत्व में अब देश की खनिज सुरक्षा मजबूत करने, वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से खनिज संसाधनों की खोज को नई गति देने पर विशेष जोर रहेगा. भारत सरकार के खान मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण देश के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थानों में से एक है. नए महानिदेशक के सामने देश के खनिज संसाधनों का आकलन, महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज और आयात पर निर्भरता कम करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी.
32 वर्षों से अधिक का अनुभव
दिनेश वी. गनवीर ने नागपुर स्थित आरटीएमएनयू विश्वविद्यालय से भूविज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1 जुलाई 1994 को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में अपना करियर शुरू किया था. अपने 32 वर्षों से अधिक के सेवाकाल में उन्होंने GSI के केंद्रीय क्षेत्र, पूर्वोत्तर क्षेत्र और उत्तरी क्षेत्र में विभिन्न वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक पदों पर काम किया. महानिदेशक बनने से पहले वह नागपुर स्थित केंद्रीय क्षेत्र के अतिरिक्त महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे. इसके साथ ही उनके पास नेशनल मिशन हेड-II की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी थी. उनका अनुभव भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और बहुविषयक भूवैज्ञानिक अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रहा है. पश्चिमी बस्तर क्रेटन में विषयगत भूवैज्ञानिक मानचित्रण तथा महाराष्ट्र के साकोली फोल्ड बेल्ट में सोने और हीरे की खोज से जुड़े कार्यों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसके अलावा, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों भीमबेटका रॉक शेल्टर्स और एलोरा की गुफाओं के संरक्षण से संबंधित भूवैज्ञानिक अध्ययनों में भी उन्होंने योगदान दिया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने भारत-पेरू संयुक्त कार्य समूह, रूस-भारत खनन उपसमूह और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित IMARC 2022 सहित कई मंचों पर GSI का प्रतिनिधित्व किया.
रणनीतिक खनिजों की खोज में पांच गुना वृद्धि
नेशनल मिशन हेड-II के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दिनेश वी. गनवीर ने देशभर में बहुविषयक भूवैज्ञानिक कार्यक्रमों और खनिज अन्वेषण अभियानों की योजना एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके नेतृत्व में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज संबंधी जांच में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई. खनिज नीलामी प्रक्रिया को गति देने के लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्वेषण ब्लॉक तैयार करने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और 377 भूवैज्ञानिक ज्ञापन सौंपे गए. इनमें 202 ब्लॉक महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित थे, जिनमें से 40 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है. वहीं, एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (EL) व्यवस्था के तहत 56 ब्लॉक सौंपे गए, जिनमें से 11 की ट्रेंच-I और II के अंतर्गत नीलामी हुई है.
खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत पर फोकस
महानिदेशक का पदभार संभालने के बाद श्री गनवीर ने GSI के वैज्ञानिक कार्यों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रभाव को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज तेज करना, आधुनिक खनिज संभाव्यता मानचित्रण, एकीकृत भूवैज्ञानिक अनुसंधान और वैज्ञानिक रूप से मजबूत खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए तैयार करना शामिल है. इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करना, विदेशों से खनिज आयात पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती देना है.
आधुनिक तकनीक, AI को मिलेगा बढ़ावा
नए महानिदेशक ने उभरती तकनीकों और उन्नत डेटा विश्लेषण को पारंपरिक जमीनी भूवैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया है. आधुनिक भूवैज्ञानिक उपकरणों एवं तकनीकों के इस्तेमाल से खनिज अन्वेषण की सटीकता और कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. इसके साथ ही प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, विश्लेषणात्मक क्षमताओं का विस्तार करना और समुद्री क्षेत्रों में खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा.
कितना बढ़ेगा काम
GSI की भूमिका केवल खनिजों की खोज तक सीमित नहीं रहेगी. संगठन बुनियादी भूवैज्ञानिक अनुसंधान, भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली, हिमनद एवं क्रायोस्फेरिक अध्ययन, बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम आकलन में भी अपनी भूमिका मजबूत करेगा. इन वैज्ञानिक अध्ययनों से सरकारी नीतियों के निर्माण, बुनियादी ढांचे की योजना, आपदा प्रबंधन और सतत विकास को वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने पर जोर
संस्थागत विकास की दिशा में श्री गनवीर ने वैज्ञानिक कर्मचारियों को सशक्त बनाने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने और योग्यता तथा बेहतर प्रदर्शन को उचित पहचान देने की आवश्यकता बताई. उन्होंने राष्ट्रीय मिशनों, क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया. संसाधनों का प्रभावी उपयोग और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक परिणामों को समय पर उपलब्ध कराना संगठन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा.
1851 में हुई थी GSI की स्थापना
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की स्थापना वर्ष 1851 में मुख्य रूप से रेलवे के विस्तार के लिए कोयला भंडार की खोज के उद्देश्य से की गई थी. समय के साथ यह संस्था भारत के भूवैज्ञानिक संसाधनों और वैज्ञानिक अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गई. GSI का मुख्य कार्य देश की भूवैज्ञानिक जानकारी तैयार करना एवं उसे अद्यतन रखना तथा खनिज संसाधनों का आकलन करना है. इसके लिए संगठन जमीनी, हवाई और समुद्री सर्वेक्षण, खनिज अन्वेषण, भू-तकनीकी एवं भू-पर्यावरणीय अध्ययन, प्राकृतिक आपदा अनुसंधान, हिमनद विज्ञान और भूकंपीय-टेक्टोनिक अध्ययन जैसे क्षेत्रों में काम करता है. कोलकाता स्थित मुख्यालय के अलावा GSI के छह क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद, शिलांग और कोलकाता में हैं. इसके साथ ही देश के लगभग सभी राज्यों में इसकी राज्य इकाइयां भी कार्यरत हैं.
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में GSI की अहम भूमिका
नए महानिदेशक के नेतृत्व में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण तेजी से बदलते भूवैज्ञानिक और तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को और विकसित करने की दिशा में काम करेगा. वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार, सहयोग और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली को प्राथमिकता देते हुए GSI देश के खनिज संसाधनों को मजबूत करने, बुनियादी ढांचे के विकास में वैज्ञानिक सहयोग देने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा. देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने से लेकर वैज्ञानिक अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने तक, दिनेश वी. गनवीर के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां और अवसर हैं. उनके नेतृत्व में GSI की भूमिका प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है.