मकर संक्रांति के मौके पर प्रधानमंत्री कार्यालय का पता बदलने जा रहा है.77 साल में ऐसा पहली बार होगा कि देश के पीएम ऑफिस अब एक नए दफ्तर से देश की बागड़ोर संभालेंगे. पीएम ऑफिस अब दिल्ली के साउथ ब्लॉक से एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में शिफ्ट होने जा रहा है. ये महज एक बिल्डिंग नहीं है बल्कि 2047 के विकसित भारत की एक छवि है. ये आधुनिक सुविधाओं से लैस है और सुरक्षा इतनी मजबूत है कि इसे भेद पाना लगभग नामुमकिन है.
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नया PMO क्यों है खास?
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बना नया PMO करीब 2 लाख 26 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है. इसे बनाने में लगभग 1,189 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. ये पूरा परिसर दुनिया की सबसे सुरक्षित बिल्डिंग में से एक है. इस परिसर में कॉन्फ्रेंस रूम, कैबिनेट रूम और पीएम कार्यालय के अलावा नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) का भी दफ्तर होगा. पीएम मोदी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके आवास और ऑफिस के बीच एक सीक्रेट अंडरग्राउंड टनल बनाई गई है. सुरंग की मदद से प्रधानमंत्री के मूवमेंट और सुरक्षा में किसी तरह की अड़चन नहीं आएगी.
77 साल बाद क्यों बदला पता?
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के वक्त से ही पीएमओ साउथ ब्लॉक में ही रहा है. ये ऑफिस ब्रिटिश राज में तैयार किया गया था. वहां जगह और सुविधाएं दोनों कम है. पुराने दफ्तर में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को फिट करना मुश्किल था. इसीलिए पीएमओ का पता बदला जा रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ नया पीएम आवास भी तैयार हो रहा है ताकि दफ्तर और घर दोनों आसपास रहें और पीएम को आने जाने में किसी तरह की तकलीफ ना हो.
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