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Dry डे खत्म, जानें सरकार ने शराबबंदी हटाने का क्यों लिया फैसला?
Manipur Liquor News : मणिपुर में शराबबंदी से राजस्व का काफी नुकसान पहुंच रहा था और राज्य में नकली शराब की भी सप्लाई बढ़ रही थी। नकली शराब पीने से लोगों के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचता है।
Manipur Liquor News : मणिपुर में अब ड्राई डे खत्म हो गया है। बीरेन सरकार ने राज्य की शराब पॉलिसी (Liquor Policy) में बदलाव किया और शराबबंदी को हटाने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने यह निर्णय राज्य का राजस्व बढ़ाने और नकली शराब की सप्लाई पर रोक लगाने के लिए लिया है। अब राज्य में खुलेआम शराब की सप्लाई और खपत होगी। आपको बता दें कि साल 1991 से शराबबंदी लागू है।
मणिपुर में शराबबंदी से राजस्व का काफी नुकसान पहुंच रहा था और राज्य में नकली शराब की भी सप्लाई बढ़ रही थी। नकली शराब पीने से लोगों के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचता है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस मुद्दों को ध्यान में रखकर कैबिनेट की बैठक बुलाई और शराबबंदी को हटा दिया। इस बैठक में शराब के उत्पादन, निर्यात, आयात, खरीद, बिक्री और खपत को अनुमति मिल गई है। इसे लेकर विभाग की ओर से बुधवार को अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
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जानें कितना मिलेगा राजस्व
इस फैसले के बाद बीरेन सरकार ने उम्मीद जताई है कि राज्य को लगभग 600-700 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का फायदा होगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी पिछले वर्ष राज्य सरकार ने आंशिक रूप से शराबबंदी से रोक हटाई थी। इसके तहत शराब की बिक्री की अनुमति मिली थी।
साल 1991 में शराब पर लगी थी पाबंदी
आपको बता दें कि मणिपुर में बड़े स्तर पर एक सार्वजनिक आंदोलन हुआ था और फिर राज्य सरकार ने 1991 के माध्यम से शराब पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद मणिपुर शराब निषेध अधिनियम 1991 में साल 2002 में संशोधन हुआ. इसके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों को छोड़कर, परंपरागत तौर पर शराब पीने वाले लोगों के लिए शराब के उत्पाद, बिक्री और खपत पर पाबंदी लगा दी गई थी।
Manipur Liquor News : मणिपुर में अब ड्राई डे खत्म हो गया है। बीरेन सरकार ने राज्य की शराब पॉलिसी (Liquor Policy) में बदलाव किया और शराबबंदी को हटाने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने यह निर्णय राज्य का राजस्व बढ़ाने और नकली शराब की सप्लाई पर रोक लगाने के लिए लिया है। अब राज्य में खुलेआम शराब की सप्लाई और खपत होगी। आपको बता दें कि साल 1991 से शराबबंदी लागू है।
मणिपुर में शराबबंदी से राजस्व का काफी नुकसान पहुंच रहा था और राज्य में नकली शराब की भी सप्लाई बढ़ रही थी। नकली शराब पीने से लोगों के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचता है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस मुद्दों को ध्यान में रखकर कैबिनेट की बैठक बुलाई और शराबबंदी को हटा दिया। इस बैठक में शराब के उत्पादन, निर्यात, आयात, खरीद, बिक्री और खपत को अनुमति मिल गई है। इसे लेकर विभाग की ओर से बुधवार को अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
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जानें कितना मिलेगा राजस्व
इस फैसले के बाद बीरेन सरकार ने उम्मीद जताई है कि राज्य को लगभग 600-700 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का फायदा होगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी पिछले वर्ष राज्य सरकार ने आंशिक रूप से शराबबंदी से रोक हटाई थी। इसके तहत शराब की बिक्री की अनुमति मिली थी।
साल 1991 में शराब पर लगी थी पाबंदी
आपको बता दें कि मणिपुर में बड़े स्तर पर एक सार्वजनिक आंदोलन हुआ था और फिर राज्य सरकार ने 1991 के माध्यम से शराब पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद मणिपुर शराब निषेध अधिनियम 1991 में साल 2002 में संशोधन हुआ. इसके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों को छोड़कर, परंपरागत तौर पर शराब पीने वाले लोगों के लिए शराब के उत्पाद, बिक्री और खपत पर पाबंदी लगा दी गई थी।