Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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Shutdown In Ladakh : केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख शनिवार को बंद रहा और लेह में एक विशाल रैली निकाली गई। ऐसा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुआ। हालांकि, केंद्र सरकार इसे लेकर वार्ता के दूसरे दौर का ऐलान कर चुकी है।
Massive rally in Leh today demanding 6th schedule for Ladakh pic.twitter.com/wtbnB1EqdK
— T Namgyal LoP (@TNamgyal5) February 3, 2024
शनिवार को हड्डियां कंपा देने वाली ठंड के बीच कारगिल और लेह में सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर एकजुट हुए। इस प्रदर्शन का आह्वान इस शुरुआत में किया गया था। बीते शुक्रवार को केंद्र ने ऐलान किया था कि गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति मांगों को लेकर दूसरे दौर की बैठक करेगी।
लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हुआ करता था। 31 अक्टूबर 2019 को इसे केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया था। इस प्रदर्शन की अगुवाई एपेक्स बॉडी लेह (एबीएल) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) नामक सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने की थी। इन संगठनों की 4 मुख्य मांगें हैं।
1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
2. संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा
3. लद्दाख के युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण
4. लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग संसदीय क्षेत्र
Here are the visuals of the today's march in Leh, Ladakh. The last one was from the archives. This is massive. https://t.co/J9Kvob2tFY pic.twitter.com/1AGoow73Zp
— Pirzada Shakir (@pzshakir6) February 3, 2024
इन मांगों को लेकर वार्ता का पहला दौर 4 दिसंबर 2023 को हुआ था। इसे लेकर गृह मंत्रालय ने जो समिति बनाई है उसकी अध्यक्षता गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कर रहे हैं। इस बैठक में उन्होंने लद्दाख की अनोखी संस्कृति और भाषा की सुरक्षा करने के लिए जरूरी मानकों पर विचार-विमर्श किया था।
अब इसे लेकर दूसरे दौर की वार्ता 19 फरवरी को होनी है। क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने परमानेंट रेसीडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) की तरह लद्दाख रेसीडेंट सर्टिफिटेक शुरू किए जाने की मांग भी की है। पीआरसी पहले जम्मू-कश्मीर में जारी किए जाते थे। सरकार ने संगठनों से प्रदर्शन रोकने की अपील की है।
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