Om Pratap
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Pinarayi Vijayan on Congress: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस का यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कोई स्पष्ट रुख है? संदेहास्पद चुप्पी धोखा देने वाली है। जब भारत की बहुलता पर संघ परिवार के हमलों का विरोध करना समय की मांग है, तो क्या कांग्रेस उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए तैयार है?
इससे पहले शनिवार को हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि कांग्रेस समान नागरिक संहिता का समर्थन करेगी। बयान के बाद उन्होंने ये भी कहा था कि वे इस मुद्दे पर पार्टी के फैसले के अनुसार चलेंगे।
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Does the @INCIndia have a clear stand on the #UniformCivilCode? Their suspicious silence is deceitful. When it is the need of the hour to resist the Sangh Parivar's attacks on India's plurality, is the INC ready to take a firm stand against them?
— Pinarayi Vijayan (@pinarayivijayan) July 6, 2023
बता दें कि लॉ कमीशन की ओर से यूसीसी पर पब्लिक ओपिनियन की मांग की गई थी। इसके बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि आगामी विधानसभा और लोकसभआ चुनावों की से वजह से यूनिफॉर्म सिविल कोड को हवा दी जा रही है।
पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता वीरप्पा मोइली ने भी आरोप लगाया कि समाज में विभाजन पैदा करने के लिए ये मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान का अनुच्छेद 25 आस्था की स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
यूनिफार्म सिविल कोड की विचारधारा एक देश-एक कानून-एक विधान पर आधारित है। संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग 4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड शब्द का जिक्र है। इसमें कहा गया है कि भारत में हर नागरिक के लिए एक समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास होना चाहिए। संविधान निर्माता डॉक्टर बीआर अंबेडकर ने संविधान को बनाते समय कहा था कि यूनिफॉर्म सिविल कोड जरूरी है।
भारत में जाति और धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून और मैरिज एक्ट हैं। अलग-अलग कानूनों के कारण न्यायिक प्रणाली पर भी असर पड़ता है। भारत में हिंदुओं के लिए हिंदू मैरिज एक्ट 1956 है, मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड है। शादी, तलाक, संपत्ति विवाद, गोद लेने और उत्तराधिकार आदि के मामलों में हिंदुओं के लिए अलग कानून हैं, जबकि मुसलमानों के लिए अलग।
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संविधान में गोवा को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। यहां हिंदू, मुस्लिम और ईसाईयों के लिए अलग-अलग कानून नहीं हैं। जिसे गोवा सिविल कोड कहा जाता है। इस राज्य में सभी धर्मों के लिए फैमिली लॉ है। यानी शादी, तलाक, उत्तराधिकार के कानून सभी धर्मों के लिए एक समान हैं।
फ्रांस, अमेरिका, रोम, सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र, मलेशिया, नाइजीरिया आदि देशों में पहले से कॉमन सिविल कोड लागू है।
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