सिवन ने प्रमोशन रोका, क्योंकि चंद्रयान मिशन फेल हुआ…ISRO चीफ की बायोग्राफी पर क्यों हो रहा हंगामा?
ISRO Chief Autobiography Controversy: ISRO चीफ एस सोमनाथ ने अपनी आत्मकथा छपवाने और इसे रिलीज करने से इनकार कर दिया है, आखिर क्यो जानिए?
Edited By : Khushbu Goyal|Updated: Nov 5, 2023 08:36
Share :
ISRO Chief S Somanath
Controversy Over ISRO Chief Autobiography: ISRO चीफ एस सोमनाथ ने अपनी आत्मकथा छपवाने और इसे रिलीज करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसमें हुए खुलासे पर विवाद छिड़ गया है। इसरो चीफ ने अपनी आत्मकथा मलयालम भाषा में लिखी है, जिसका नाम है ‘निलावु कुदिचा सिम्हांगल’(शेर दैट गज़ल्ड द मूनलाइट) , जो इसरो चीफ के संघर्षों, हिम्मत और जज्बे की कहानी है। केरल में लिपि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इसरो चीफ की आत्मकथा नवंबर में रिलीज होनी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि इसरो चीफ ने आत्मकथा में अपने से जुड़े हर पहलू का जिक्र किया है, इसलिए उन्होंने इस पर इसरो के पूर्व चीफ के सिवन और चंद्रयान-2 मिशन के बारे में भी लिखा है। इन्हीं 2 मुद्दों पर अब विवाद छिड़ा है।
यह भी पढ़ें: वैज्ञानिकों की डराने वाली चेतावनी, भूल जाइए सर्दी, दिसंबर-जनवरी में भी छूटेंगे पसीने
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आत्मकथा में सोमनाथ द्वारा किए गए एक खुलासे से हंगामा मचा है। बायोग्राफी में लिखा गया है कि के सिवन नहीं चाहते थे कि सोमनाथ का प्रमोशन हो। वे इसरो के अगले चीफ बनें। सोमनाथ ने बायोग्राफी में चंद्रयान-2 की नाकामी का भी जिक्र किया है कि चंद्रयान-2 जल्दबाजी के कारण फेल हुआ था और मिशन से पहले किए जाने वाले प्रोजेक्ट से जुड़े सभी टेस्ट भी नहीं हुए थे। इन्हीं कारणों से चंद्रयान-2 मिशन पूरा नहीं हो पाया। सूत्रों से मीडिया तक यह जानकारी पहुंची तो बवाल हो गया। वहीं सोमनाथ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैंने अपनी बायोग्राफी में किसी पर निजी टिप्पणी नहीं की। किसी व्यक्ति विशेष का इसमें जिक्र नहीं किया गया है। न ही किसी पर आरोप लगाए। इसमें मैंने सिर्फ अपने से जुड़े मुद्दों और किस्सों का जिक्र किया है।
इसरो चीफ सोमनाथ के अनुसार, अपनी बायोग्राफी में मैंने अपने बचपन से लेकर ISRO चीफ बनने तक की कहानी बताई है। जब इंसान प्रोफेशनल हो जाता है तो वह चाहता है कि ऊंचाइयों पर पहुंचा जाए। हर इंसान की तरह मैंने भी चाहा और इस राह में जिस तरह हर किसी को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, मैंने भी किया। उन्हीं दिक्कतों का जिक्र बायोग्राफी में हुआ है। इसरो चीफ बनने तक मैंने जो समस्याएं उठाईं, उनका जिक्र इसमें हुआ है और वे सब एक दूसरे से जुड़ी हैं। बायोग्राफी में इंसान खुद के बारे में लिखता है। जो जैसे हुआ है, जब हुआ है, वह लिखता है। यही मैंने किया है। इसका मतलब यह नहीं कि मैंने किसी पर आरोप लगाए हैं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। मेरी बायोग्राफी में लिखी बातों को गलत लिया जा रहा है, इसलिए इसे अब छापा नहीं जाएगा।
Controversy Over ISRO Chief Autobiography: ISRO चीफ एस सोमनाथ ने अपनी आत्मकथा छपवाने और इसे रिलीज करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसमें हुए खुलासे पर विवाद छिड़ गया है। इसरो चीफ ने अपनी आत्मकथा मलयालम भाषा में लिखी है, जिसका नाम है ‘निलावु कुदिचा सिम्हांगल’(शेर दैट गज़ल्ड द मूनलाइट) , जो इसरो चीफ के संघर्षों, हिम्मत और जज्बे की कहानी है। केरल में लिपि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इसरो चीफ की आत्मकथा नवंबर में रिलीज होनी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि इसरो चीफ ने आत्मकथा में अपने से जुड़े हर पहलू का जिक्र किया है, इसलिए उन्होंने इस पर इसरो के पूर्व चीफ के सिवन और चंद्रयान-2 मिशन के बारे में भी लिखा है। इन्हीं 2 मुद्दों पर अब विवाद छिड़ा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आत्मकथा में सोमनाथ द्वारा किए गए एक खुलासे से हंगामा मचा है। बायोग्राफी में लिखा गया है कि के सिवन नहीं चाहते थे कि सोमनाथ का प्रमोशन हो। वे इसरो के अगले चीफ बनें। सोमनाथ ने बायोग्राफी में चंद्रयान-2 की नाकामी का भी जिक्र किया है कि चंद्रयान-2 जल्दबाजी के कारण फेल हुआ था और मिशन से पहले किए जाने वाले प्रोजेक्ट से जुड़े सभी टेस्ट भी नहीं हुए थे। इन्हीं कारणों से चंद्रयान-2 मिशन पूरा नहीं हो पाया। सूत्रों से मीडिया तक यह जानकारी पहुंची तो बवाल हो गया। वहीं सोमनाथ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैंने अपनी बायोग्राफी में किसी पर निजी टिप्पणी नहीं की। किसी व्यक्ति विशेष का इसमें जिक्र नहीं किया गया है। न ही किसी पर आरोप लगाए। इसमें मैंने सिर्फ अपने से जुड़े मुद्दों और किस्सों का जिक्र किया है।
इसरो चीफ सोमनाथ के अनुसार, अपनी बायोग्राफी में मैंने अपने बचपन से लेकर ISRO चीफ बनने तक की कहानी बताई है। जब इंसान प्रोफेशनल हो जाता है तो वह चाहता है कि ऊंचाइयों पर पहुंचा जाए। हर इंसान की तरह मैंने भी चाहा और इस राह में जिस तरह हर किसी को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, मैंने भी किया। उन्हीं दिक्कतों का जिक्र बायोग्राफी में हुआ है। इसरो चीफ बनने तक मैंने जो समस्याएं उठाईं, उनका जिक्र इसमें हुआ है और वे सब एक दूसरे से जुड़ी हैं। बायोग्राफी में इंसान खुद के बारे में लिखता है। जो जैसे हुआ है, जब हुआ है, वह लिखता है। यही मैंने किया है। इसका मतलब यह नहीं कि मैंने किसी पर आरोप लगाए हैं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। मेरी बायोग्राफी में लिखी बातों को गलत लिया जा रहा है, इसलिए इसे अब छापा नहीं जाएगा।