भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव बजट सत्र खत्म होते ही हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी के नागपुर दौरे के बाद इसमें और ज्यादा तेजी आ गई है। सूत्रों के अनुसार 30 मार्च को पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात के दौरान नए अध्यक्ष के नाम पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने नागपुर से लौटने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की।
13 राज्यों में पूरे हुए चुनाव
पीएम मोदी ने नागपुर से लौटने के बाद अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और बीएल संतोष से राज्यों के संगठनात्मक चुनाव को लेकर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री ने नड्डा और बीएल संतोष से कहा है कि इस महीने बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव पूरा करें। जानकारी के अनुसार बीजेपी ने अब तक 13 अध्यक्ष चुन लिए हैं। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 19 राज्यों में चुनाव पूरे होना जरूरी हैं।
बता दें कि जेपी नड्डा पिछले 5 साल से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। सूत्रों की मानें तो बीजेपी जल्द ही उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत शेष बचे अधिकांश राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा जल्द ही कर देगी। ऐसे में आइये जानते हैं बीजेपी अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार कौन-कौन से हैं?
शिवराज सबसे प्रबल दावेदार
शिवराज सिंह चैहान 4 बार मध्यप्रदेश के सीएम रह चुके हैं। वहीं 6 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। फिलहाल केंद्र में कृषि मंत्री हैं। सीएम रहते लाडली बहना योजना शुरू की, जोकि भारतीय राजनीति के लिए गेमचेंजर साबित हुई। संघ की पसंद में शिवराज सिंह चैहान सबसे ऊपर हैं।
कार्यकर्ताओं से दूर रहते हैं प्रधान
बीजेपी अध्यक्ष के दावेदारों में दूसरा नाम धर्मेंद्र प्रधान का है। धर्मेंद्र प्रधान वर्तमान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं। पीएम मोदी और शाह के भरोसेमंद माने जाते हैं। इसके बाद अलावा संघ के करीबी भी हैं। हालांकि शिवराज की तुलना में उनका कद छोटा है, इसमें कोई दोराय नहीं हैं। इसके अलावा कार्यकर्ताओं से ज्यादा मेल मिलाप में विश्वास नहीं रखते हैं जोकि एक बड़ा माइनस प्वांइट भी है।
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खट्टर की एक बड़ी कमजोरी
अध्यक्ष के दावेदारों में तीसरा नाम मनोहरलाल खट्टर का है। जोकि संघ और पीएम मोदी की पहली पसंद हैं। खट्टर को लेकर अमित शाह ज्यादा खुश नहीं हैं। इसकी एक वजह उनका अड़ियल रवैया भी है। फिलहाल केंद्र में शहरी और आवास मंत्रालय संभाल रहे खट्टर के पास 9 साल तक लगातार हरियाणा सीएम के तौर पर काम करने का अनुभव है। पीएम मोदी के साथ शुरुआती दौर में साथ काम भी किया है। खट्टर की सबसे बड़ी कमजोरी भी कार्यकर्ताअें से कम मेल-मिलाप होना है। जोकि उनका सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट है। इन तीन नेताओं के अलावा सुनील बंसल, दक्षिण से जी.किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार, डी. पुरंदेश्वरी, वानति श्रीनिवासन जैसे नामों की भी चर्चा है।
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