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“अखंड प्रहार” में दिखी भारतीय सेना की ताकत, ले. जनरल ने कोणार्क कोर की युद्ध तैयारी की समीक्षा की

भारतीय सेना के अखंड प्रहार अभ्यास में कोणार्क कोर की ताकत और आधुनिक युद्धक तैयारी का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस अभ्यास का निरीक्षण किया, जो “त्रिशूल” का हिस्सा है। अभ्यास में थलसेना और वायुसेना ने संयुक्त ऑपरेशन क्षमता दिखाई, जिसमें ड्रोन सर्विलांस, एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक सामरिक योजनाओं का प्रयोग हुआ।

Author Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 11, 2025 22:10
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अखंड प्रहार में कोणार्क कोर के ताकत का प्रदर्शन देखने को मिला है. इस मौके में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में आयोजित अभ्यास अखंड प्रहारके दौरान कोणार्क कोर की युद्ध तैयारी और परिचालन और ताकत का जायजा लिया. यह सैन्य अभ्यास “त्रिशूल” का अहम हिस्सा है, जिसका मकसद थल, वायु और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त ऑपरेशन क्षमता को परखना है.

फील्ड एक्सरसाइज में सेना की मल्टी-डोमेन क्षमताओं और इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सिस्टम को मजबूत करने पर फोकस किया गया. इस दौरान ले. जनरल ने लाइव संयुक्त युद्धाभ्यास देखा, जिसमें थलसेना और वायुसेना के बीच समन्वय, ड्रोन सर्विलांस, एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक सामरिक योजनाओं का प्रदर्शन किया गया.

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ले. जनरल सेठ ने की सैनिकों की सराहना

सैनिकों से बातचीत में ले. जनरल सेठ ने उनके समर्पण, कौशल और नवाचार भावना की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह अभ्यास बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार भारतीय सेना की तैयारी और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि “अखंड प्रहार” दक्षिणी कमान की विचारधारा — “Jointness, Atmanirbharta और Innovation (JAI)” — का उदाहरण है. यह अभ्यास सिर्फ त्रि-सेवा समन्वय को नहीं बल्कि तकनीकी नवाचार और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को भी मजबूत करता है. इस अभ्यास के माध्यम से भूमि और वायु की युद्धक क्षमता का बेहतरीन तालमेल सामने आया है. “अखंड प्रहार” भारतीय सेना की आत्मनिर्भर, तकनीक-सक्षम और नवाचार-प्रधान युद्ध प्रणाली की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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समीक्षा के दौरान, सेना कमांडर ने बैटल एक्स डिवीजन और कोणार्क कोर द्वारा विकसित कई युद्धक्षेत्र नवाचारों की भी समीक्षा की. इनमें स्वदेशी रूप से निर्मित ड्रोन, ड्रोन-रोधी समाधान और उन्नत बल सुरक्षा प्रणालियां शामिल थीं, जो सेना की आत्मनिर्भरता और संरचना स्तर पर स्वदेशी नवाचार के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं.

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इसके साथ ही, इंडो-पाक बॉर्डर पर भारतीय सेना ने भविष्य के युद्ध की प्रैक्टिस की. पाकिस्तानी सीमा से सटे जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में आर्मी और एयरफोर्स ने संयुक्त अभ्यास किया. दुश्मन के ठिकानों को पता लगा कर ड्रोन से हमले किए. ड्रोन के जरिए अनाउंसमेंट कर गांवों को खाली कराया गया.

First published on: Nov 11, 2025 10:10 PM

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