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अहमदाबाद में लगातार बढ़ रहे धोखाधड़ी के मामले, हर 2 दिन में 3 केस; 40 फीसदी जालसाजी ऑनलाइन

Ahmedabad online fraud cases: अहमदाबाद से चौंका देने वाले आंकड़े जालसाजी को लेकर आए हैं। यहां पर लगातार जालसाजी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले तीन साल में धोखाधड़ी के मामलों में बेहताशा वृद्धि देखने को मिली है। 2021-22 में सिर्फ 587 केस दर्ज किए गए थे। वहीं, 2022-23 में मामले कम […]

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Ahmedabad online fraud cases: अहमदाबाद से चौंका देने वाले आंकड़े जालसाजी को लेकर आए हैं। यहां पर लगातार जालसाजी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले तीन साल में धोखाधड़ी के मामलों में बेहताशा वृद्धि देखने को मिली है। 2021-22 में सिर्फ 587 केस दर्ज किए गए थे। वहीं, 2022-23 में मामले कम हुए। केवल 537 ही केस दर्ज हुए। देखने में आ रहा है कि जितने केस आ रहे हैं, उनमें 40 फीसदी मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी के हैं। अधिकतर मामले चेक बाउंस, एटीएम फ्रॉड और भूमि से संबंधित फ्रॉड के हैं।

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2021 से 2022 में खोई राशि 80 प्रतिशत तक बढ़ी है। पांच साल की बात करें तो गुजरात में लगभग 235 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी फ्रॉड में देखने को मिली है। वहीं, 2021 में साइबर क्राइम के 1536 केस रजिस्टर हुए थे। ये आंकड़े लूनावाड़ा विधायक गुलाब सिंह चौहान के सवाल के जवाब में सरकार की ओर से दिए गए हैं। जिसके बाद सामने आया है कि हर दो दिन में 3 केस सामने आ रहे हैं। 2020-21 में 435 केस दर्ज किए गए थे। प्रदेश में 2022-23 में 6300 शिकायतें आई थीं। जिसके बाद कहा जा रहा है कि अपराध लगातार 21 फीसदी तक बढ़ रहा है।

2322 लोगों को अभी गिरफ्तार किया जाना बाकी

प्रदेश में खोई राशि 2020-21 में 884.37 करोड़ रुपये दर्शाई गई थी, जो 2021-22 में 80 फीसदी बढ़कर 1588.36 करोड़ बन गई। 2022-23 में ये राशि 1571.87 करोड़ थी। अपराध में सरकार ने 12167 लोगों को शामिल बताया है। जिसमें 2322 लोगों को अरेस्ट किया जाना बाकी है। प्रति शिकायत धोखाधड़ी की ऐवरेज राशि की बात करें तो यह 70.84 लाख निकलती है। सेक्सटॉर्शन रैकेट की शिकायतों में भी इजाफा हो रहा है। वहीं, तत्काल ऋण ऐप्स से जुड़े साइबरबुलिंग से जुड़ी काफी शिकायतें भी पुलिस को मिल रही हैं।

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पहले लोग घरों तक सीमित रह करते थे खरीदारी

2020-21 के हिसाब से पुलिस बताती है कि इस दौरान लोग ऑनलाइन खरीदारी की ओर ज्यादा आकर्षित हुए थे। इससे पहले वे लोग अपने घरों तक ही सीमित रह खरीदारी कर रहे थे। उस समय ई-वॉलेट और डिजिटल ऐप से भुगतान का काम अधिक हो रहा था। लेकिन पुलिस बताती है कि अधिकांश लोगों को रिफंड और रिटर्न के दौरान धोखा मिला। अधिकतर लोगों ने संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था। कई लोगों ने वो क्यूआर कोड स्कैन किया था। जिसे जालसाजों की ओर से उनको भेजा गया था।

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First published on: Sep 26, 2023 09:24 AM
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