आजकल लोगों का शेड्यूल इतना बिजी रहने लगा है कि लोगों को शांत बैठने या खुद पर ध्यान देने का टाइम ही नहीं मिल पाता. इसकी वजह से लोग स्ट्रेस या बेचैनी का शिकार हो जाते हैं. कुछ लोग अवसाद जैसी बीमारी का सामना करते हैं, क्योंकि खुद के बारे में लोग सोचते ही नहीं हैं. जब मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है तो डॉक्टर के पास जाकर दवा को रूटीन में शामिल करते हैं. हालांकि, हर चीज का हल सिर्फ दवाओं में नहीं मिलता, कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो दिल को सुकून देने का काम करती हैं. योग इस लिस्ट में शामिल है, क्योंकि बाबा रामदेव का कहना है कि अगर योग को कुछ ही देर के लिए अपने रूटीन में शामिल किया जाए तो मन और शरीर हेल्दी रहता है और दिमाग में भी अच्छे ख्याल आते हैं. योग या प्राणायाम को अपने रूटीन में शामिल किया जाए तो स्ट्रेस या मन की हलचल को शांत किया जा सकता है. अगर आप भी दिन की शुरुआत मायूसी और बेचैनी के बजाय अच्छी सोच के साथ करना चाहते हैं तो इन 5 योगासनों और योगाभ्यासों को अपनी सुबह के रूटीन में शामिल कर सकते हैं.
इसे भी पढ़ें- भाग्यश्री ने बताया बच्चों को चुकंदर खिलाने का तरीका, शेयर की बीटरूट चीला बनाने की रेसिपी, आप भी कर सकते हैं ट्राई
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
सुबह का माहौल शांत होता है और इस वक्त अनुलोम-विलोम का अभ्यास करना बेस्ट हो सकता है. आप सांसों पर ध्यान लगाकर, मन को शांत करके इसका अभ्यास कर सकते हैं.
कैसे करें?
- सबसे पहले कुर्सी की तरह सीधा बैठ जाएं.
- फिर दाएं नथुने को बंद करके बाएं नथुने से धीरे-धीरे सांस लें.
- अब बाएं नथुने को बंद करके दाएं नथुने से सांस छोड़ें.
- इसके बाद दाएं नथुने से सांस लें और बाएं से छोड़ें.
- शुरुआत में 3 से 5 मिनट तक कर प्रैक्टिस करना बेस्ट हो सकता है.
भ्रामरी प्राणायाम
अगर मन में लगातार बुरे ख्याल आ रहे हैं या बेचैनी महसूस हो रही हो तो भ्रामरी प्राणायाम करना बेस्ट हो सकता है. इसे अपने रूटीन में नीचे बताए गए स्टेप्स से कर सकते हैं.
कैसे करें अभ्यास?
- सबसे पहले शांत जगह पर सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें.
- धीरे-धीरे सांस अंदर लें और सांस छोड़ते वक्त मुंह बंद कर लें.
- फिर हल्की गुनगुनाहट की आवाज निकालें. इस आसन को लगभग 7 बार करें.
ताड़ासन
ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने में मदद कर सकता है. इसलिए सुबह लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के बजाय हल्की हल्का योग किया जा सकता है.
कैसे करें अभ्यास?
- अपने दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं.
- फिर दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं.
- चाहें तो एड़ियां उठाकर पंजों पर संतुलन बनाने की कोशिश करें.
- सांस लेते हुए कुछ सेकंड ऐसे ही रहें और धीरे-धीरे इस योग को दोहराएं.
वज्रासन
वज्रासन में बैठने से शरीर को स्थिर रखने और कुछ देर शांत होकर सांसों पर ध्यान देने में मदद मिल सकती है.
कैसे करें अभ्यास?
- सबसे पहले घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठ जाएं.
- फिर दोनों हाथों को जांघों पर रखें और पीठ सीधी रखें.
- आंखें बंद करके सांस लें और शुरुआत में 1 से 3 मिनट तक बैठें.
शवासन
शवासन शरीर और मन को आराम देने के लिए किया जाने वाला एक योगाभ्यास है. इसे आप सुबह के वक्त अपने रूटीन में इस योग को शामिल कर सकते हैं.
कैसे करें अभ्यास?
- पीठ के बल आराम से लेट जाएं.
- फिर दोनों पैरों को थोड़ा अलग रखें और हाथों को शरीर के बगल में ढीला छोड़ दें.
- बंद करके सांस लेते रहें और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को ढीला छोड़ने पर ध्यान दें.
- फिर 5 से 10 मिनट तक आराम करें.
इसे भी पढ़ें- 2 साल के बच्चे के लिए कितना होना चाहिए स्क्रीन टाइम? WHO ने बताया बच्चों को कितनी देर खेलने दें और कितना सुलाएं
संबंधित खबरें
खाना खाने के बाद बढ़ जाती है शुगर तो 10 मिनट करें यह काम, AIIMS ने बताया
3 hrs agoहाथ सुन्न हो जाना या हाथों में झुनझुनी महसूस होना किस बीमारी का लक्षण है?
5 hrs agoब्रेस्ट में गांठ के बिना भी हो सकता है कैंसर, दिखें ये लक्षण तो रहें सतर्क
22 hrs agoचेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन… AIIMS ने बताया
1 day agoनेफ्थलीन बॉल्स का करते हैं इस्तेमाल? कई देशों में बैन है यह कीटनाशनक दवा
1 day agoHIV होने पर जीभ पर दिखते हैं ऐसे निशान, जानिए पुरुषों में एचआईवी के लक्षण
1 day agoबिना भूखे रहे और जल्दबाजी किए ऐसे घटाएं वजन, यहां जानें सीक्रेट
1 day agoसिर्फ महिला की नहीं, पुरुषों की सेहत से भी जुड़ा है बच्चा न होने का मामला
2 days agoहाई बीपी से किडनी और दिमाग को कैसे पहुंचता है नुकसान?
2 days agoकहीं बवासीर समझकर कैंसर को तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? डॉक्टर ने बताया
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
Source- Baba ramdev
First published on:
Know More: Editorial Guidelines