2 साल के बच्चे के लिए कितना होना चाहिए स्क्रीन टाइम? WHO ने बताया बच्चों को कितनी देर खेलने दें और कितना सुलाएं

Kids Screen Time: विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए किस उम्र के बच्चे के लिए कितना स्क्रीन टाइम सही है, कितनी देर उसे फिजिकल एक्टिविटी करवानी चाहिए और कितनी देर की नींद उसके लिए पर्याप्त होनी चाहिए.

Baby Screen Time

बच्चे को कितनी देर दिखाएं फोन, जानिए यहां. Image Credits - AI

How Much A Baby Should Sleep: बच्चों की परवरिश में अक्सर ही माता-पिता के सामने यह सवाल रहता है कि बच्चे के लिए क्या सही है और क्या नहीं. बच्चे के सही वृद्धि और विकास के लिए उसे कितनी देर सोने दिया जाए, कितनी देर खेलने के लिए कहें, उसे कितना एक्टिव रखें, कब आराम करवाएं और उसका स्क्रीन टाइम कितना रखें वगैरह सवाल हमेशा मन में बने रहते हैं. वहीं, बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है वैसे-वैसे हर एक्टिविटी का समय बदलना चाहिए या नहीं यह भी एक बड़ी उलझन रहती है. ऐसे में पेरेंट्स की इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कुछ गाइडलाइंस जारी की गई हैं. इन गाइडलाइंस में बच्चों के लिए उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम (Baby Screen Time) कितना होना चाहिए, उसे कितना खेलने देना चाहिए और कितना सुलाना चाहिए जैसी सलाह दी गई है.

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बच्चे के लिए स्क्रीन टाइम, खेलने और सोने का समय

WHO के अनुसार, बच्चे की फिजिकल एक्टिविटी को बेहतर करके, सिडेंट्री टाइम को कम करके और उसे क्वालिटी स्लीप देकर उसकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को अच्छा रखा जा सकता है.

1 साल से कम बच्चे के लिए –

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अगर बच्चे की उम्र 1 साल से कम है तो उसे जमीन पर ही खेलने देना चाहिए. बच्चे को दिनभर में कम से कम 30 मिनट का स्क्रीन टाइम देना चाहिए.

इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा कभी भी एक घंटे से ज्यादा किसी चीज से बंधा हुआ ना हो, जैसे स्ट्रॉलर में ना हो, कुर्सी पर लगातार ना बैठा हो या स्ट्रैप के जरिए केयरगिवर की पीठ से ना लगा हुआ हो.

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कितना हो स्क्रीन टाइम – इस उम्र के बच्चे के लिए स्क्रीन टाइम बिल्कुल नहीं होना चाहिए यानी इतने छोटे बच्चे को मोबाइल या टीवी नहीं दिखाना चाहिए. अगर बच्चा आराम कर रहा है तो उस दौरान उसे कहानी पढ़कर सुनाई जा सकता है.

कितनी देर सुलाएं – 1 साल से कम बच्चे को पर्याप्त नींद लेने देनी चाहिए. अगर बच्चा 0-3 महीने का है तो उसे 14 से 17 घंटे नींद की जरूरत होती है. वहीं, 4 से 11 महीने के बच्चे के लिए 12 से 16 घंटे की नींद पर्याप्त होती है.

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1 से 2 साल के बच्चे के लिए –

इस उम्र के बच्चे को दिनभर में तकरीबन 180 मिनट तक अलग-अलग तरह की फिजिकल एक्टिविटी करवानी चाहिए. बच्चे को 1 घंटे से ज्यादा एक ही जगह पर एक ही पॉजीशन में नहीं रहने देना चाहिए.

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कितना हो स्क्रीन टाइम – 1 साल के बच्चे के लिए टीवी या वीडियो देखने या कंप्यूटर पर गेम्स खेलने की सलाह नहीं दी जाती है. 2 साल के बच्चे का स्क्रीन टाइम 1 घंटे से ज्यादा ना हो यह ध्यान रखना जरूरी है. जब बच्चा कुछ नहीं कर रहा है तो उसे कहानी पढ़कर सुनाई जा सकती है.

कितनी देर सुलाएं – 1 से 2 साल तक बच्चे के लिए 11 से 14 घंटे की नींद पर्याप्त होती है. इसमें रेग्यूलर स्लीप और नैप वगैरह शामिल हैं.

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3 से 4 साल के बच्चे के लिए –

3 से 4 के बच्चे को रोजाना तकरीबन 180 मिनट फिजिकली एक्टिव रहना चाहिए. इस उम्र में बच्चों को 1 घंटे से ज्यादा एक ही तरह से रिस्ट्रेन करके नहीं रखना चाहिए.

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कितना हो स्क्रीन टाइम – इस उम्र में बच्चे का स्क्रीन टाइम 1 घंटे से कम होना चाहिए. कुछ ना करने के दौरान बच्चे को कहानी पढ़कर सुनाई जा सकती है.

कितनी देर सुलाएं – 3 से 4 साल के बच्चे को 10 से 13 घंटों की अच्छी नींद लेने देनी चाहिए. इसमें रेग्यूलर स्लीप, वेकअप टाइम और नैप शामिल हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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