Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं. यह व्रत पति की की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए किया जाता है. करवा चौथ व्रत रखने से दांपत्य जीवन में खुशियां आता है. करवा चौथ पर पूरा दिन निर्जला व्रत रखना होता है. यह बहुत ही कठिन व्रत है. व्रत सुबह सूर्योदय के बाद शुरू होता है. इसके बाद चंद्रोदय के बाद चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन होता है.
बिना कुछ खाएं-पिए करवा चौथ का व्रत किया जाता है. ऐसे में करवा चौथ पर कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. सेहत को ध्यान में रखते हुए ही करवा चौथ का व्रत करें. कई परिस्थितियों में महिलाओं को करवा चौथ का व्रत करने से बचना चाहिए. वरना इसके कारण आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. करवा चौथ का निर्जला व्रत किन लोगों को नहीं रखना चाहिए? आइये इसके बारे में जानते हैं.
पीरियड्स के दौरान
पीरियड्स यानी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-अर्चना करने की मनाही होती है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान व्रत और पूजा करने से बचना चाहिए. इसके अलावा पेट दर्द, थकान, कमजोरी या अधिक रक्तस्राव की समस्या से दिक्कते हो सकती हैं.
गर्भवती महिलाएं
गर्भवती महिलाओं को करवा चौथ पर निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए. इसके कारण सेहत पर बुरा असर हो सकता है. व्रत करने से डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमजोरी के कारण परेशान होना पड़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान व्रत करने से बचना चाहिए. अगर आप व्रत कर रही हैं तो, डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.
स्तनपान कराने वाली माताएं
अगर कोई नवजात शिशु की माता बच्चे को स्तनपान कराती हैं तो उन्हें करवा चौथ का व्रत नहीं रखना चाहिए. इन महिलाओं के शरीर को पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थों की जरूरत होती है. वरना थकान और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. इन महिलाओं को बच्चे और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए.
स्वास्थ्य समस्याएं
लो ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एनीमिया और अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित महिलाओं को करवा चौथ का व्रत नहीं रखना चाहिए. बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को निर्जला व्रत के कारण अत्यधिक कमजोरी हो सकती है. ऐसे में सेहत को लेकर नुकसान हो सकता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यातों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.