अच्छी सेहत के लिए सिर्फ खानपान, डाइट और फिजिकल एक्टिविटी ही जरूरी नहीं है, बल्कि शरीर को फिट बनाए रखने के लिए पूरी नींद लेना भी जरूरी होता है. आपने कई लोगों को देखा होगा कि उनका डाइट अच्छी होती है, फिट रहने के लिए जिम जाते हैं, सब्जियों व फलों का सेवन करते हैं, लेकिन ऑफिस के काम आदि के कारण पूरी नींद नहीं लेते हैं, जिस कारण सेहत बिगड़ती रहती है. आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि ठीक से नींद का पूरा न इंसान को वक्त से पहले बूढ़ा बना देती है. इस स्टोरी में हम आपको इसी आम से दिखने वाली समस्या के बारे में बताएंगे, जिस कारण लोग जल्दी बुढ़ापे की तरफ जा रहे हैं.
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तनाव-काम प्रभावित कर देती है नींद
आप गौर करेंगे कि जब भी आप किसी को नींद तो लेकर सवाल करेंगे कि तुम कितने घंटे सोते हो या फिर कब सोते हो, तो उनके पास से एक ही जवाब मिलेगा- ‘यार नींद कहां पूरी हो पाती है 1 बजे नींद आई थी, फिर सुबह 7 बजे उठ गया. यह बात कहने और सुनने में आम लग सकती है, लेकिन यही शरीर को बीमारियों का घर बना देती है. इतना ही नहीं, कई लोगों को मालूम ही नहीं होता है कि, फिट रहने के लिए एक व्यक्ति को कितने घंटे की नींद लेनी चाहिए? ऐसे में अगर आप भी ये महत्वपूर्ण जानकारी नहीं रखते हैं और गंभीर बीमारियों का शिकार नहीं होना चाहते हैं, तो नींद की टाइमिंग जरूर जानें.
बच्चों से लेकर बड़ों तक किसे कितना सोना चाहिए?
National Sleep Foundation के अनुसार, उम्र के साथ नींद की जरूरत में बदलाव होता रहता है, यानी बच्चों को जहां ज्यादा नींद की जरूरत होती है, वहीं, बड़े उम्र के लोगों के नींद की जरूरत में बदलाव रहता है;
नवजात शिशु: 0-3 महीने की उम्र में, बच्चों को 14 से 17 घंटे की नींद की जरूरत होती है. इसमें दिन में ली गई झपकी भी शामिल है, क्योंकि नवजात शिशु शायद ही कभी पूरी रात लगातार सोते हैं. थोड़े बड़े बच्चों (4-11 महीने) को हर दिन लगभग 12 से 15 घंटे की नींद की जरूरत होती है.
छोटे बच्चे: जिंदगी के पहले और दूसरे साल के बीच, छोटे बच्चों को हर रात 11 से 14 घंटे की नींद की जरूरत होती है, तभी उनका विकास अच्छे से हो पाता है.
बच्चे: प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों (3-5 साल) को 10 से 13 घंटे की नींद मिलनी चाहिए, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों (6-13 साल) को हर रात 9 से 11 घंटे सोने की कोशिश करनी चाहिए.
युवा: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनकी नींद की जरूरत थोड़ी कम हो जाती है. नौजवान (14-17 साल) को हर रात लगभग आठ से 10 घंटे की नींद की जरूरत होती है, वरना शरीर कम उम्र में ही कमजोर होने लगता है.
बालिग: 18 से 64 साल की उम्र के वयस्कों (Adult) को हर रात 7 से 9 घंटे सोने की कोशिश करनी ही चाहिए. अगर आपकी उम्र 65 साल से ज्यादा है, तो आपको थोड़ी कम नींद की जरूरत हो सकती है, लेकिन सात से आठ घंटे सोने की सलाह अक्सर दी जाती है. हालांकि, नींद की कमी और जरूरत से ज्यादा सोना सेहत को खराब कर सकती है, जिसमें एक बड़ी समस्या वक्त से पहले बूढ़ापा है.
नींद की कमी कैसे बूढ़ा बना देती है
PMC के अनुसार, अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों पर की गई एक स्टडी में, 3 रातों की सामान्य नींद के मुकाबले, नींद की भारी कमी वाली रात की शिफ्ट के बाद DNA को नुकसान पहुंचते देखा गया है. साथ ही, नींद की कमी के बाद डॉक्टरों में DNA रिपेयर जीन का एक्सप्रेशन भी कम पाया गया, जिससे पता चलता है कि नींद की कमी के दौरान हुए नुकसान की मरम्मत करने की क्षमता कम हो गई थी. कुल मिलाकर, मौजूदा रिसर्च इस बात का समर्थन करती है कि नींद की कमी से DNA को नुकसान पहुंचने के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसी कड़ी में ये भी पता चलता है कि नींद की कमी के कारण सेलुलर सेनेसेंस (कोशिकाओं का बूढ़ा होना) जैविक उम्र बढ़ने की एक मुख्य पहचान के बारे में भी जानकारी हासिल हुई. बता दें कि, सेलुलर सेनेसेंस (Cellular Senescence) या कोशिकीय वृद्धावस्था एक ऐसी जैविक प्रक्रिया है जिसमें शरीर की कोशिकाएं अलग होना स्थायी रूप से बंद कर देती हैं, लेकिन वे मरती नहीं हैं. इन्हें अक्सर ‘जॉम्बी कोशिकाएं’ (Zombie Cells) भी कहा जाता है, क्योंकि ये शरीर में मौजूद रहकर हानिकारक रसायन छोड़ती हैं, जो बुढ़ापे और उम्र से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं.
कुल मिलाकर PMC की रिसर्च इस नतीजे पर पहुंचती है कि, नींद में गड़बड़ी कई तरह से नुकसान बढ़ाती है; जैसे सेल्स का बूढ़ा होना (सेल्यूलर सेनेसेंस), टेलोमेरे की लंबाई कम होना, टेलोमेरेज एक्टिविटी में बदलाव और एपिजेनेटिक एजिंग की रफ्तार बढ़ना, डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारी का खतरा और बीपी की समस्या का भी कारण बन सकती है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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Source: PMS, National Sleep Foundation
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