हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Explainer : जब 'तरबूज' बोलकर ममता बनर्जी ने छोड़ी थी कांग्रेस, जानिए कैसे हुआ था TMC का जन्म और क्या है आज का नया संकट

तृणमूल कांग्रेस के जन्म से पहले, 1990 के दशक में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस संगठन के भीतर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी थीं. साल 1997 में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया.

विज्ञापन

श्चिम बंगाल की राजनीति आज एक बार फिर उसी चौराहे पर आ खड़ी हुई है, जिसने 1990 के दशक के उत्तरार्ध में राज्य की सियासत को हमेशा के लिए बदल दिया था. आज तृणमूल कांग्रेस के भीतर जो बगावत और आंतरिक कलह मची है, वह ठीक वैसी ही है जैसी परिस्थितियों में ममता बनर्जी ने कभी कांग्रेस से नाता तोड़कर टीएमसी की नींव रखी थी.

जब कांग्रेस में अलग-थलग पड़ गई थीं ममता

तृणमूल कांग्रेस के जन्म से पहले, 1990 के दशक में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस संगठन के भीतर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी थीं. साल 1997 में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया. अगस्त 1997 में कोलकाता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का एक बड़ा सत्र आयोजित हुआ. उस समय सीताराम केसरी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और सोमेन मित्रा बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे. कांग्रेस का एक धड़ा चाहता था कि ममता को किसी तरह पार्टी में रोक लिया जाए, लेकिन ममता बनर्जी का मानना था कि कांग्रेस आलाकमान जानबूझकर बंगाल में उनके वामपंथ विरोधी आंदोलन को दबा रहा है.

यह भी पढ़ें : कौन हैं ममता के बागी ऋतब्रत बनर्जी, कभी वामपंथियों के थे चहेते, क्या अब बनेंगे TMC के ‘शिंदे’?

विज्ञापन

क्या थी वो ‘वॉटरमेलन थ्योरी’

उस दौर में राष्ट्रीय राजनीति और संसद में टिके रहने के लिए कांग्रेस पूरी तरह से वामपंथ के समर्थन पर निर्भर थी. ममता बनर्जी को लगता था कि इसी राजनीतिक मजबूरी के कारण दिल्ली में बैठी कांग्रेस लीडरशिप बंगाल में माकपा के खिलाफ आक्रामक रुख नहीं अपना रही है. इसी हताशा के बीच ममता बनर्जी के खेमे ने कांग्रेस नेताओं पर हमला करने के लिए एक राजनीतिक मुहावरा गढ़ा, जिसे ‘वॉटरमेलन थ्योरी’ कहा गया. ममता के समर्थकों का आरोप था कि कांग्रेस के ये नेता तरबूज की तरह हैं – ‘जो बाहर से तो हरे (कांग्रेस के रंग में) दिखते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह लाल (CPM की विचारधारा के प्रति नरम) हैं’. यानी वे जनता के सामने तो वामपंथ का विरोध करते हैं, लेकिन अंदरखाने उनकी सत्ता बचाए रखने में मदद करते हैं.

यह भी पढ़ें : क्या ममता को मात दे पाएंगे ऋतब्रत? समझें- 54 के जादुई आंकड़े का गणित, जिससे तय होगा TMC का असली ‘किंग’

विज्ञापन

इंडोर बनाम आउटडोर

1997 के उसी कोलकाता सत्र के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने इतिहास बदल दिया. कांग्रेस नेतृत्व ने अंदर एक हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया था, जबकि ममता बनर्जी ने उसी वेन्यू के ठीक बाहर एक समानांतर जनसभा बुला ली. हैरान करने वाली बात यह रही कि हॉल के अंदर की आधिकारिक बैठक से कई गुना ज्यादा भीड़ बाहर ममता बनर्जी की रैली में उमड़ पड़ी. आम कार्यकर्ता और समर्थक चुपचाप आधिकारिक कार्यक्रम से निकलकर ममता के चारों ओर जमा हो गए. यह इस बात का साफ संकेत था कि ममता बनर्जी का जनाधार अब कांग्रेस संगठन का मोहताज नहीं रहा. इसके बाद ही तृणमूल कांग्रेस का जन्म हुआ.

यह भी पढ़ें : पहली बार के MLA ने कैसे हिला दी ममता की सत्ता? जानें TMC में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ के पीछे का पूरा इनसाइड गेम

विज्ञापन

अनोखा संयोग

भारतीय राजनीति में कांग्रेस से अलग होकर कई पार्टियां बनीं, जैसे मुलायम सिंह की सपा या लालू प्रसाद की राजद, लेकिन टीएमसी का प्रयोग सबसे अलग रहा क्योंकि इसने न सिर्फ अस्तित्व बचाए रखा बल्कि लगातार तीन बार से बंगाल की सत्ता पर काबिज है. जिस टीएमसी का जन्म खुद बगावत और सांगठनिक असंतोष से हुआ था, आज वह खुद आंतरिक बिखराव से जूझ रही है. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी गुट आज ठीक वैसे ही आरोप टीएमसी के वर्तमान नेतृत्व पर लगा रहा है, जैसे कभी ममता ने कांग्रेस पर लगाए थे.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola