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Explainer: हूतियों के हमले का क्या पड़ेगा असर, बढ़ेंगी तेल की कीमतें? जहाज बचाने का नया तरीका

Houthi attacks on ships in Red Sea increased: हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे इजराइल और अमेरिका से हिसाब बराबर करेंगे। अमेरिका और ब्रिटेन उनके कब्जे वाले इलाकों पर बम बरसा रहे हैं।

Edited By : Shubham Singh | Updated: Jan 13, 2024 16:32
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Houthi rebels attack in Red Sea
यमन के हूती विद्रोहियों पर अमेरिका और ब्रिटेन ने किया हमला

Houthi rebels of Yemen attacking cargo ships in Red Sea amid Israel Hamas war: इजराइल और हमास के बीच जारी जंग के बीच यमन के विद्रोही गुट हूती विद्रोही लाल सागर में लगातार समुद्री मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। जिस वजह से कंपनियां इस रास्ते से जहाज भेजने से कतरा रही हैं। हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन ने हूतियों से निपटने के लिए उनपर हमला शुरू किया है। ज्यादा समय तक अगर जहाज इस रास्ते से नहीं गुजरेंगे तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि इस रास्ते बड़ी मात्रा में तेल भेजा जाता है।

हूतियों के इस हमले की वजह इजराइल का गाजा में हमला है। हूती फिलिस्तिनियों की साथ एकजुटता दिखाने के लिए ऐसे हमले कर रहे हैं। अब अमेरिका हूती विद्रोहियों पर बम बरसाने लगा है। बावजूद इसके हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे यमन से आने वाले जहाजों पर हमला करेंगे।

बता दें कि लाल सागर का यह रास्ता व्यापार के लिए बहुत अहम है क्योंकि दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार इसी मार्ग से होता है। स्वेज नहर के रास्ते हर साल 17 हजार से ज्यादा जहाज गुजरते हैं। जानकारों का कहना है कि हूती खुद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी ऐसा कर सकते हैं। इसका मकसद इजराइल पर दबाव बनाना भी हो सकता है। अब अमेरिका, ब्रिटेन समेत उनके कई सहयोगी देशों ने कॉमर्शियल शिप्स पर हमले को रोकने के लिए हूतियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

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अन्य मार्ग अपनाने पर 10 गुना बढ़ेगी लागत

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर और दिसंबर के बीच लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हूतियों के हमले 500% बढ़ गए हैं। इस वजह से कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते जहाज भेजने से कतरा रही हैं और अन्य मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर हैं। लेकिन इस वजह से सामान भेजने की लागत 10 गुना बढ़ गई है। इस रास्ते के बाद अफ्रीका के चारों तरफ घूमकर जाने का रास्ता बचता है। इससे 4 हजार मील की एक्स्ट्रा दूरी तय करनी पड़ सकती है जिसमें खर्च ज्यादा आएगा।

लॉजिस्टिक्स टेक कंपनी फ्लेक्सीपोर्ट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि 389 कंटेनर जहाज पहले ही स्वेज नहर के रास्ते से हट चुके हैं। यह दुनिया की कंटेनर क्षमता का लगभग 20 प्रतिशत है। अन्य कंटेनर जहाज भी ऐसा ही कर रहे हैं।

चीन से अपना संबंध क्यों बता रहे हैं जहाज

न्यूज 18 ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि लाल सागर से गुजरने वाले 5 जहाज अपने संकेतों का उपयोग चीन से संबंध बताने में कर रहे हैं ताकि हूती विद्रोही उनपर हमले नहीं करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 5 में से दो इस समय लाल सागर में हैं, दो एशिया के रास्ते में संकटग्रस्त जलमार्ग से सफलतापूर्वक गुजर गए हैं और पांचवां अदन की खाड़ी की ओर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।

कौन हैं विद्रोही जो इलाके में मचाते हैं आतंक

बता दें कि हूती यमन का विद्रोही गुट है जिसका वहां के एक बड़े इलाके पर कब्जा है और वे उस क्षेत्र में अपनी सरकार चलाते हैं। यमन की सरकार से इनका टकराव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके पास करीब 20 हजार लड़ाके हैं। हूतियों का ज्यादा प्रभाव यमन के पश्चिमी इलाके में है। हूतियों ने साल 2014 के युद्ध में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था।

यमन में लंबे समय से गृहयुद्ध की स्थिति है। हूती सउदी अरब विरोधी और ईरान समर्थित हैं। इसकी वजह ये है कि हूति शिया हैं और ईरान भी शिया बहुल देश है। सऊदी में सुन्नी ज्यादा हैं इस वजह से उनका उससे टकराव है। एक महीने पहले भी टर्की से चलकर भारत आ रहे एक शिप को हूतियों ने लाल सागर में अगवा कर लिया था। इसमें 25 क्रू मेंबर्स को बंधक बना लिया गया था।

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First published on: Jan 13, 2024 03:47 PM

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