Nana Patekar Acting Career: नाना पाटेकर का नाम भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी अलग एक्टिंग स्टाइल स पहचान बनाई. उनकी आवाज, डायलॉग बोलने का अंदाज और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की कला ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाया. करीब पांच दशक के लंबे करियर में उन्होंने गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक कई तरह के रोल किए. हिंदी के साथ उन्होंने मराठी सिनेमा में भी काम किया और कई बड़े अवॉर्ड अपने नाम किए.
थिएटर से शुरू हुआ एक्टिंग का सफर
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. फिल्मों में आने से पहले वह थिएटर से जुड़े थे. एक्टिंग में उनकी शुरुआत आसान नहीं रही, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी जगह बनाई. साल 1978 में फिल्म गमन से उन्होंने फिल्मों में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में छोटे-बड़े कई किरदार निभाए.
‘परिंदा’ ने दिलाई बड़ी पहचान
नाना पाटेकर के करियर में साल 1989 की फिल्म परिंदा एक बड़ा मोड़ साबित हुई. इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया और उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. इसके बाद इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक गंभीर और दमदार अभिनेता के तौर पर और मजबूत हो गई. परिंदा के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.
‘क्रांतिवीर’ के लिए बने नेशनल अवॉर्ड विनर
साल 1994 में आई क्रांतिवीर में नाना पाटेकर ने ऐसा किरदार निभाया, जिसे दर्शों ने खूब पसंद किया. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड भी मिला था. इसके बाद अग्निसाक्षी में उनके अभिनय को भी काफी सराहा गया और उन्हें एक बार फिर नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला.
गंभीर किरदारों से कॉमेडी तक
नाना पाटेकर की खासियत ये रही कि उन्होंने खुद को सिर्फ गंभीर किरदारों तक सीमित नहीं रखा. उन्होने खामोशी: द म्यूजिकल, राजू बन गया जेंटलमैन, अंगार और तिरंगा जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. बाद के दौरा में वेलकम जैसी कॉमेडी फिल्म में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी एक अलग छवि बना दी. जिसे लोगों बेहद पसंद किया.
अब तक छप्पन में दिखा अलग अंदाज
फिल्म अब तक छप्पन में नाना पाटेकर ने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया. फिल्म में उनके शांत लेकिन सख्त अंदाज को काफी पसंद किया गया. यह फिल्म उनके उन किरदारों में शामिल रही, जिनमें उन्होंने बिना ज्यादा दिखावे के अपने अभिनय से असर छोड़ा.
एक्टिंग के साथ निर्देशन में भी आजमाया हाथ
नाना पाटेकर ने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा. साल 1991 में उन्होंने फिल्म प्रहार: द फाइनल अटैक से निर्देशन में भी कदम रखा. वह इस फिल्म के निर्देशक और अभिनेता दोनों थे.
मिले कई बड़े सम्मान
नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड, चार फिल्मफेयर अवॉर्ड और दो फिल्मफेयर मराठी अवॉर्ड मिल चुके हैं. साल 2013 में भारत सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया. इस तरह करीब पांच दशक के करियर में नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई.
बता दें, आज 8 अक्टूबर को एक्टर नाना पाटेकर का निधन हो गया. इस खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके फैंस को बड़ा झटका लगा है. अपने लंबे करियर में नाना ने कई ऐसी फिल्में दीं, जिनमें उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं.