Madhubala Adult Movie Name: भारतीय सिनेमा के इतिहास में आज से 76 साल पहले 1950 में रिलीज हुई फिल्म 'हंसते आंसू' आज भी बॉलीवुड की चर्चा में है. इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में पहली बार 'ए' सर्टिफिकेट (वयस्कों के लिए) पाया. सिर्फ 16 साल की मधुबाला इसमें लीड रोल में थीं. लेकिन फिल्म के टाइटल और बोल्ड सीन को लेकर खूब बवाल मचा था.
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फिल्म का टाइटल क्यों बना विवाद का कारण?
इस फिल्म का नाम था 'हंसते आंसू'. लोग सोचने लगे कि फिल्म में हल्की फुल्की कॉमेडी होगी, लेकिन मूवी की कहानी गंभीर थी. टाइटल का डबल मीनिंग सेंसर बोर्ड को संझ नहीं आया और फिल्म को ए सर्टिफिकेट घोषित कर दिया. उस समय यह बहुत बड़ी बात हुआ करती थी. कई लोग इसे परिवार के साथ नहीं देखने गए.
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घरेलू हिंसा पर बनीं कहानी
950 में रिलीज हुई फिल्म 'हंसते आंसू' की कहानी घरेलू हिंसा और महिला अधिकारों पर थी. इसमें समाज की संकीर्ण सोच का दृश्य दिखाया गया था. 16 साल की मधुबाला ने बहुत साहस से ये रोल किया. उनके बोल्ड सीन और मजबूत अभिनय ने दर्शकों के होश उड़ा दिए. उस जमाने में ऐसी कहानी दिखाना बहुत हिम्मत का काम था. लेकिन फिल्म का डबल मीनिंग टाइटल होने की वजह से फिल्म को काफी लोगों ने गलत दृष्टि से देखा.
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बवाल और समाज का रिएक्शन
फिल्म रिलीज होते ही खूब चर्चा में आई. कुछ लोगों ने तारीफ की कि यह प्रोग्रेसिव फिल्म है. लेकिन कई ने विरोध किया. वे कहते थे कि युवा मधुबाला को ऐसे रोल नहीं करने चाहिए. मधुबाला खुद अपनी फिल्म थिएटर में नहीं देख पाईं क्योंकि वे नाबालिग थीं. ए सर्टिफिकेट की वजह से उन्हें एंट्री नहीं मिली. फिर भी फिल्म कमर्शियल रूप से सफल रही. मधुबाला की लोकप्रियता बढ़ी. यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई.
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यादगार बनी फिल्म
आज 76 साल बाद भी 'हंसते आंसू' को याद किया जाता है क्योंकि यह समय से आगे की फिल्म थी. इसमें महिला की संघर्ष की कहानी सही ढंग से दिखाई गई. मधुबाला की हसीन अदाकारी आज भी दिल छू लेती है. यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि बॉलीवुड में बदलाव की शुरुआत कितनी मुश्किल थी.
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