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Success Story Of Prakash Agrawal : पिता के जमे हुए बिजनेस को छोड़कर अपना कारोबार शुरू करना आसान नहीं होता। वह भी तब जब जेब में बहुत ज्यादा पूंजी न हो। लेकिन कहते हैं कि जो लोग रिस्क लेते हैं, कामयाबी भी उन्हीं के कदम चूमती है। ऐसी की कामयाबी की प्रार्थना प्रकाश अग्रवाल ने अगरबत्ती के कारोबार में उतरने के दौरान की थी। भगवान ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और आज उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 650 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इंदौर के रहने वाले 64 साल के प्रकाश अग्रवाल जेड ब्लैक अगरबत्ती बनाने वाली कंपनी मैसूर दीप परफ्यूमरी हाउस (MDPH) के फाउंडर हैं।

पुश्तैनी दुकान पर बैठना नहीं था पसंद

प्रकाश तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। वह बताते हैं कि इंदौर में उनकी पुश्तैनी किराना की दुकान थी। प्रकाश के पिता दुकान चलाते थे। बड़ा बेटा होने के नाते उनसे भी उम्मीद थी कि वह दुकान को संभालेंगे, लेकिन प्रकाश को दुकान पर बैठना पसंद नहीं था। वह अपना कोई कारोबार करना चाहते थे। ऐसा कारोबार जिसमें खुद का कोई प्रोडक्ट हो। हालांकि पैसे न होने के कारण इस बात की उन्हें चिंता रहती थी कि वह अपना प्रोडक्ट कैसे बनाएंगे।

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कई कारोबार में मिली असफलता

80 के दशक की बात है। प्रकाश ने कम पैसे में कई कारोबार में कदम रखा जैसे शैंपू, नहाने का साबुन, कपड़े धाने का साबुन, हेयरऑइल आदि। लेकिन किस्मत ने धोखा दिया और कोई भी बिजनेस नहीं चल पाया। इस दौरान वह कपड़े की दुकान पर सेल्समैन का काम करते थे। बिजनेस में असफल होने और आर्थिक समस्याओं के कारण उनकी मां ने उनसे कहा कि वह बेंगलुरु जाएं और किसी बड़े ब्रांड की अगरबत्ती की एजेंसी लेकर उसे इंदौर में बेचें।

MDPH

MDPH कंपनी के डायरेक्टर अंकित और अंशुल अग्रवाल।

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1992 में रखी कंपनी की नींव

प्रकाश ने अपनी मां की बात तो मानीं लेकिन दूसरे तरीके से। उन्होंने इंदौर में अपने छोटे से गैरेज से 1992 में मैसूर दीप परफ्यूमरी हाउस (MDPH) की नींव रखी। यह वह दौर था जब बेंगलुरु की अगरबत्ती काफी फेमस हुआ करती थीं। उन्होंने ‘पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण’ के नाम से मार्केट में अपनी पहली अगरबत्ती लॉन्च की। यह अगरबत्ती लोगों को काफी पसंद आई। इससे उन्हें आत्मविश्वास आया और इसी कारोबार में आगे बढ़ने का फैसला किया।

18 साल बाद बदल गया सबकुछ

प्रकाश अपनी अगरबत्ती पर बेंगलुरु का ही पता डलवाते थे, ताकि लोगों को यह लगे कि यह अगरबत्ती बेंगलुरु से आ रही है। वह बेंगलुरु के इस मिथक को तोड़ना चाहते थे। साल 2000 में उन्होंने ‘जेड ब्लैक’ नाम से अगरबत्ती की प्रीमियम रेंज लॉन्च की। इस पर उन्होंने बेंगलुरु का नहीं बल्कि इंदौर का पता छपवाया। इस अगरबत्ती ने मार्केट में आते ही धूम मचा दी। इस अगरबत्ती की सप्लाई के लिए देश के कई दूसरे हिस्से से प्रकाश अग्रवाल को फोन आने लगे। कुछ ही समय में यह प्रोडक्ट देशभर में छा गया।

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सफर में लगा ब्रेक

कहते हैं कि सफलता का सफर कई बार झटके भी देता है। ऐसा ही झटका लगा 2003 में। दरअसल, उस समय प्रकाश की नई फैक्ट्री में आग लग गई थी। उस फैक्ट्री में अगरबत्तियां रखी होने के कारण आग ने और विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते फैक्ट्री लगभग पूरी तरह राख हो गई थी। यह प्रकाश के लिए काफी बड़ा झटका था। नतीजा हुआ कि उन्होंने फिर से जगह किराए पर ली और नए सिरे से शुरुआत की।

आज 15 लाख पैकेट बिकते हैं रोज

महेंद्र सिंह धोनी और ऋतिक रोशन जैसे स्टार जेड ब्लैक के ब्रांड एम्बेसडर रह चुके हैं। जेड ब्लैक अगरबत्ती के टीवी पर आने वाले विज्ञापन में इसकी टैग लाइन ‘प्रार्थना होगी स्वीकार’ काफी फेमस है। आज कंपनी अगरबत्ती के अलावा धूपबत्ती, खाने वाला तेल, हैंड सैनिटाइजर, हैंड वॉश, पैकेज्ड चाय, प्राकृतिक हेयर कलर आदि चीजें भी बना रही है। कंपनी रोजाना अगरबत्तियों के 15 लाख पैकेट बेचती है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी का सालाना टर्नओवर 650 करोड़ रुपये रहा है।

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First published on: Jul 06, 2024 07:00 AM

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