Life Insurance Premium Missed: किस्त छूटी तो क्या बंद हो जाएगा लाइफ कवर? जानें पॉलिसी रिवाइवल के नियम

Life Insurance Grace Period & Revival: लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम मिस हो जाए तो क्या होता है? जानिए ग्रेस पीरियड, पॉलिसी लैप्स और क्लेम रिजेक्शन से बचने के आसान उपाय.

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अगर आप ड्यू डेट पर प्रीमियम नहीं भर पाते हैं, तो पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती. इंश्योरेंस कंपनियां आपको अतिरिक्त समय देती हैं, जिसे ग्रेस पीरियड कहते हैं.

जिंदगी की भागदौड़ में कई बार हम जीवन बीमा (Life Insurance) का प्रीमियम भरना भूल जाते हैं. कभी बैंक खाते में पैसे कम होते हैं, तो कभी ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) फेल हो जाता है. कई लोग सोचते हैं कि कोई बात नहीं, बाद में पे कर देंगे, पॉलिसी तो चल ही रही होगी! लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रीमियम मिस होने के बाद आपकी पॉलिसी का लाइफ कवर (Life Cover) किस दिन खत्म होता है?

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हाल ही में महाराष्ट्र के एक मामले में, जहां एक व्यक्ति की मौत के बाद 70 लाख रुपये का क्लेम सिर्फ इसलिए खारिज हो गया क्योंकि पॉलिसी लैप्स (Lapse) हो चुकी थी. आइए समझते हैं कि प्रीमियम न भरने पर आपकी पॉलिसी के साथ क्या-क्या होता है.

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ग्रेस पीरियड (Grace Period): पहली ढाल

अगर आप ड्यू डेट पर प्रीमियम नहीं भर पाते हैं, तो पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती. इंश्योरेंस कंपनियां आपको अतिरिक्त समय देती हैं, जिसे ग्रेस पीरियड कहते हैं. इस दौरान आपकी पॉलिसी पूरी तरह एक्टिव मानी जाती है. अगर इस बीच कोई अनहोनी हो जाए, तो नॉमिनी को क्लेम का पैसा (प्रीमियम काटकर) मिल जाता है. ग्रेस पीरियड खत्म होते ही आपकी पॉलिसी लैप्स हो सकती है.

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लैप्स (Lapse) होने का मतलब क्या है?
अगर ग्रेस पीरियड खत्म होने तक भी प्रीमियम जमा नहीं होता, तो पॉलिसी लैप्स हो जाती है. टर्म प्लान (Term Insurance) में लाइफ कवर पूरी तरह खत्म हो जाता है. अगर पॉलिसीधारक को कुछ होता है, तो परिवार को 1 रुपया भी क्लेम नहीं मिलेगा. वहीं ट्रेडिशनल प्लान (Traditional Plans) में अगर आप कुछ सालों तक प्रीमियम भर चुके हैं, तो पॉलिसी पूरी तरह बंद होने के बजाय Paid-up Value (कम फायदों वाली पॉलिसी) में बदल सकती है.

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पॉलिसी रिवाइव करना (Revival Period) vs एक्टिव पॉलिसी
लोग सबसे बड़ी गलती यहीं करते हैं! अगर कंपनी कहती है कि आप अपनी लैप्स पॉलिसी को दोबारा शुरू (Revive) कर सकते हैं, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका लाइफ कवर एक्टिव है.

रिवाइवल सिर्फ एक मौका है. यह आपको पॉलिसी दोबारा शुरू करने की अनुमति देता है. जब तक आप बकाया प्रीमियम, ब्याज और मेडिकल शर्तें पूरी नहीं कर लेते, तब तक आपकी पॉलिसी एक्टिव नहीं मानी जाएगी. अपने एजेंट या कंपनी से हमेशा पूछें क‍ि क्या मेरी पॉलिसी आज की तारीख में इन-फोर्स (Active) है या नहीं?

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क्या पुराना भरा हुआ पैसा वापस मिलता है?
हर मामले में पुराना प्रीमियम वापस नहीं मिलता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि पॉलिसी किस टाइप की है. अगर पॉल‍िसी टर्म प्‍लान है तो इसमें जमा किया गया प्रीमियम वापस नहीं मिलता.अगर सेविंग्स/एंडोमेंट प्लान है तो इसमें अगर आपने कुछ तय सालों तक प्रीमियम भरा है, तो नियम और शर्तों के हिसाब से सरेंडर वैल्यू मिल सकती है.

प्रीमियम मिस हो जाए तो तुरंत करें ये 4 काम

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स्टेटस चेक करें: तुरंत कंपनी की ऐप या कस्टमर केयर से पता करें कि आपकी पॉलिसी एक्टिव है या ग्रेस पीरियड चल रहा है.

ग्रेस पीरियड में ही पेमेंट करें: अगर टाइम बचा है, तो तुरंत ऑनलाइन पेमेंट कर दें.

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ऑटो-डेबिट पर अंधा भरोसा न करें: मैसेज जरूर चेक करें कि बैंक से पैसा कटा है या नहीं.

नॉमिनी को जानकारी दें: अपनी पॉलिसी नंबर, कंपनी का नाम और पेपर्स के बारे में अपने नॉमिनी (घर के सदस्यों) को जरूर बताकर रखें.

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लाइफ इंश्योरेंस हम अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए लेते हैं. Revivable (दोबारा शुरू करने योग्य) और Active (चालू) पॉलिसी के अंतर को समझें. अगर गलती से किस्त छूट गई है, तो उसे तुरंत भरें और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखें.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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