12 सितंबर को लगेगी नेशनल Lok Adalat, जानें कौन-से ट्रैफिक चालान हो सकते हैं 100% माफ, इन पर देना होगा पूरा जुर्माना

12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत लगने जा रही है, जहां कई पुराने ट्रैफिक चालानों का निपटारा हो सकता है. लेकिन हर चालान माफ नहीं होगा. जानें किन ट्रैफिक चालानों पर मिल सकती है पूरी राहत और किन मामलों में भरना पड़ेगा पूरा जुर्माना.

National Lok Adalat

12 सितंबर को लगेगी नेशनल लोक अदालत. (Image Credit-AI)

सड़क पर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में नियम टूट जाता है और चालान कट जाता है. अगर आपके वाहन का भी कोई पुराना ट्रैफिक चालान पेंडिंग है तो आपके लिए राहत की खबर है. 12 सिंतबर को नेशनल लोक अदालत लगने जा रही है, जहां कई लंबित मामलों का कम समय और कम खर्च में निपटारा किया जा सकता है. हालांकि हर तरह के चालान पर माफी नहीं मिलती. ऐसे में लोक अदालत जाने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन से चालान माफ हो सकते हैं और किन मामलों में पूरा जुर्माना देना पड़ सकता है.

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क्या लोक अदालत में चालान पूरी तरह माफ हो जाता है?

लोक अदालत में मामलों का निपटारा आम अदालतों की तुलना में कम समय और कम खर्च में किया जा सकता है. छोटे ट्रैफिक मामलों में कई बार चालान की राशि काम कर दी जाती है. कुछ मामलों में चाला पूरी तरह माफ भी हो सकता है. हालांकि, माफी या कम जुर्माने का फैसला मामले की स्थिति और सुनवाई के दौरान तय होता है.

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किन ट्रैफिक चालान में मिल सकती है राहत?

अगर चालान बिना हेलमेट वाहन चलाने, सीट बेल्ट न लगाने, ट्रैफइक सिग्नल तोड़ने, गलत तरीक से पार्किंग करने, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट न होने या इंश्योरेंस खत्म होने जैसे मामलों से जुड़ा है तो लोक अदालत में राहत मिले की संभावना रहती है. कुछ मामलों में जज बिना जुर्माना लगाए भी मामले का निपटारा कर सकते हैं.

क्या हर चालान माफ हो जाएगा?

ऐसा जरूरी नहीं है कि लोक अदालत में पहुंचने वाला हर चालान माफ कर दिया जाए. चालान किस नियम के उल्लंघन के लिए काटा गया है और मामला कितना गंभीर है इसके आधार पर फैसला लिया जाता है. इसलिए लोक अदालत को हर तरह से ट्रैफिक चालान की 100 प्रतिशत माफी की गारंटी नहीं माना जा सकता.

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किन मामलों में नहीं मिलेगी राहत?

ट्रैफिक नियमों के गंभीर उल्लंघन वाले मामलों में लोक अदालत से राहत मिलना मुश्किल होता है. इनमें नशे में वाहन चलाना और हिट एंड रन जैसे गंभीर मामले शामिल हैं. ऐसे मामलों में लोक अदालत भी पूरा जुर्माना लगा सकती है और मामले का निपटारा नियमों के मुताबिक किया जाता है.

लोक अदालत जाने से पहले क्या समझना जरूरी है?

अगर आपकी गाड़ी का चालान लंबित है और आप उसे लोक अदालत में निपटाना चाहते हैं तो पहले यह जरूर देख लें कि आपका मामला किस तरह के उल्लंघन से जुड़ा है. छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों में राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में पूरा जुर्माना देना पड़ सकता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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