सड़क पर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन कई बार जल्दबाजी या लापरवाही में नियम टूट जाता है और चालान कट जाता है. अगर आपके वाहन का भी कोई पुराना ट्रैफिक चालान पेंडिंग है तो आपके लिए राहत की खबर है. 12 सिंतबर को नेशनल लोक अदालत लगने जा रही है, जहां कई लंबित मामलों का कम समय और कम खर्च में निपटारा किया जा सकता है. हालांकि हर तरह के चालान पर माफी नहीं मिलती. ऐसे में लोक अदालत जाने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन से चालान माफ हो सकते हैं और किन मामलों में पूरा जुर्माना देना पड़ सकता है.
क्या लोक अदालत में चालान पूरी तरह माफ हो जाता है?
लोक अदालत में मामलों का निपटारा आम अदालतों की तुलना में कम समय और कम खर्च में किया जा सकता है. छोटे ट्रैफिक मामलों में कई बार चालान की राशि काम कर दी जाती है. कुछ मामलों में चाला पूरी तरह माफ भी हो सकता है. हालांकि, माफी या कम जुर्माने का फैसला मामले की स्थिति और सुनवाई के दौरान तय होता है.
किन ट्रैफिक चालान में मिल सकती है राहत?
अगर चालान बिना हेलमेट वाहन चलाने, सीट बेल्ट न लगाने, ट्रैफइक सिग्नल तोड़ने, गलत तरीक से पार्किंग करने, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट न होने या इंश्योरेंस खत्म होने जैसे मामलों से जुड़ा है तो लोक अदालत में राहत मिले की संभावना रहती है. कुछ मामलों में जज बिना जुर्माना लगाए भी मामले का निपटारा कर सकते हैं.
क्या हर चालान माफ हो जाएगा?
ऐसा जरूरी नहीं है कि लोक अदालत में पहुंचने वाला हर चालान माफ कर दिया जाए. चालान किस नियम के उल्लंघन के लिए काटा गया है और मामला कितना गंभीर है इसके आधार पर फैसला लिया जाता है. इसलिए लोक अदालत को हर तरह से ट्रैफिक चालान की 100 प्रतिशत माफी की गारंटी नहीं माना जा सकता.
किन मामलों में नहीं मिलेगी राहत?
ट्रैफिक नियमों के गंभीर उल्लंघन वाले मामलों में लोक अदालत से राहत मिलना मुश्किल होता है. इनमें नशे में वाहन चलाना और हिट एंड रन जैसे गंभीर मामले शामिल हैं. ऐसे मामलों में लोक अदालत भी पूरा जुर्माना लगा सकती है और मामले का निपटारा नियमों के मुताबिक किया जाता है.
लोक अदालत जाने से पहले क्या समझना जरूरी है?
अगर आपकी गाड़ी का चालान लंबित है और आप उसे लोक अदालत में निपटाना चाहते हैं तो पहले यह जरूर देख लें कि आपका मामला किस तरह के उल्लंघन से जुड़ा है. छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों में राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में पूरा जुर्माना देना पड़ सकता है.
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