भारतीय ऑटो सेक्टर ने वित्त वर्ष 25 (FY25) में पैसेंजर वाहनों को जबरदस्त एक्सपोर्ट करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इसमें एक्सपोर्ट करने में मारुति सुजुकी सबसे आगे रही है। कंपनी ने 332,585 वाहनों को एक्सपोर्ट किया है जोकि सबसे ज्यादा है। जबकि निसान, फ़ॉक्सवैगन और होंडा कार्स इंडिया भी अन्य टॉप कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा गाड़ियां एक्सपोर्ट की हैं। 2030 तक मारुति और हुंडई भी सरकारी लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए एक्सपोर्ट को बढ़ाने का टारगेट लेकर चल रही हैं।
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड संख्या में पैसेंजर वाहनों को एक्सपोर्ट किया है, जिससे भारत की विनिर्माण साख की बढ़ती वैश्विक मान्यता पर बल मिला, क्योंकि प्रमुख कंपनियों मारुति सुजुकी, हुंडई और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े बाजारों में सेवा प्रदान करने के लिए देश में उत्पादन सुविधाओं का उपयोग किया।
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रिपोर्ट्स के से पता चलता है कि 31 मार्च, 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष में 755,000-765,000 वाहन भेजे गए, जो पिछले वर्ष बेची गई 672,000 यूनिट्स की तुलना में 12-14% की ग्रोथ दिखाता है। आज तक, महामारी से पहले के वित्त वर्ष 19 में निर्यात का रिकॉर्ड 676,000 यूनिट्स का है। लोकल बाजार में बिक्री में मारुति सुजुकी 332,585 यूनिट्स के साथ एक्सपोर्ट की सूची में सबसे आगे थी।
मारुति और हुंडई 100 देशों में अपने 17 मॉडल को भेजती है। एक्सपोर्ट सेगमेंट में इन दोनों का योगदान 43% है। वहीं हुंडई भारत से लगभग 60 देशों को एक्सपोर्ट करती है, कंपनी ने भी पिछले वित्त वर्ष में लगभग 163,000 यूनिट निर्यात की। हुंडई के लिए सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको, चिली और पेरू सबसे बड़े एक्सपोर्ट बाजारों में से हैं।
इसके अलावा टाटा मोटर्स और महिंद्रा की गाड़ियां भी एक्सपोर्ट होती हैं लेकिन बहुत कम, इन दोनों कंपनियों का मार्केट शेयर 0.3% और 1.9% है। उम्मीद जताई जा रही है अगले कुछ महीनों में इन दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार,निसान,होंडा कार्स इंडिया और वोक्सवैगन क्रमशः 9%, 8% और 6% हिस्सेदारी के साथ भारत से एक्सपोर्ट करने वाली टॉप पांच कार निर्माताओं में शामिल हैं।
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