Numerology: न्यूमरोलॉजी के अनुसार किसी व्यक्ति की जन्मतिथि उसके जीवन का रोडमैप तैयार कर सकती है। जन्मतिथि से दो अंक निकलते हैं। इसमें पहला होता है मूलांक और दूसरा भाग्यांक होता है। इन दोनों नंबर्स का अलग-अलग मतलब होता है।
मूलांक को Root Number तो भाग्यांक को Destiny Number कहा जाता है। ये दोनों ही अंक ज्योतिष के महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। इनका उपयोग व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन को समझने के लिए किया जाता है।
क्या होता है मूलांक?
व्यक्ति का जन्म महीने की जिस तारीख को होता है, वह उसका मूलांक या रूट नंबर या फिर बर्थ नंबर होता है। ये 1 से 9 के बीच में ही होता है। अगर किसी व्यक्ति का जन्म महीने के 10 से लेकर 31 तारीख को हुआ होता है तो इस दोनों अंकों का योग मूलांक होता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति का जन्म महीने की 25 तारीख को हुआ है तो उसका मूलांक (2+5=7) अंक (7) होगा। इसकी प्रकार अगर 29 को हुआ है तो (2+9=11) (1+1=2) अंक (2) उस व्यक्ति का मूलांक होगा। वहीं, 1 से 9 तारीख तक जन्मे लोगों का मूलांक वही तारीख होती है।
मूलांक का क्या होता है प्रभाव?
जन्मांक या मूलांक से व्यक्ति की सोच, स्वभाव और व्यक्तिगत गुणों का अंदाजा लगाया जाता है।
क्या होता है भाग्यांक?
भाग्यांक को लाइफ पाथ नंबर, नियति अंक या डेस्टिनी नंबर के नाम से जाना जाता है। किसी व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों का योग भाग्यांक होता है। इसमें जन्म की तारीख, महीने और वर्ष के अंकों का योग किया जाता है।
उदाहरण: यदि जन्म तिथि 25-03-1995 है, तो
भाग्यांक = 2 + 5 + 0 + 3 + 1 + 9 + 9 + 5 = 34 = 3 + 4 = 7
इसका भाग्यांक 7 होगा।
क्या बताता है भाग्यांक?
भाग्यांक से जीवन की संभावनाओं, सफलता और भाग्य में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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