5 मई को होगा उपछाया चंद्रग्रहण, जानिए क्या होता है और कब से लगेगा सूतक
Edited By Sunil Sharma

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Chandra Grahan: वर्ष 2023 का पहला चंद्रग्रहण बुद्ध पूर्णिमा के दिन (अर्थात् 5 मई 2023) को हो रहा है। यह एक उपछाया ग्रहण है जो बहुत कम होता है। शास्त्रों में इसे पूर्ण ग्रहण नहीं मानते हुए सूतक आदि के नियमों से भी मुक्त रखा गया है। जानिए क्या होता है उपछाया ग्रहण
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं (1) पूर्ण ग्रहण, (2) आंशिक ग्रहण तथा (3) उपछाया ग्रहण। इनमें पूर्ण ग्रहण तब होता है जब सूर्य अथवा चन्द्रमा पूरी तरह से ढंक जाते हैं। इसी प्रकार आंशिक ग्रहण में सूर्य और चंद्रमा पूरी तरह से नहीं ढंकते वरन उनका कुछ हिस्सा परछाई के कारण छिप जाता है। इसी प्रकार उपछाया ग्रहण में सूर्य और चंद्रमा का कुछ हिस्सा परछाई के कारण छिप जाता है।
यही कारण है कि शास्त्रों में उपछाया ग्रहण को पूर्ण ग्रहण न मानते हुए सूतक आदि के नियमों से मुक्त रखा जाता है। इस काल में मंदिर भी खुले रखे जाते हैं, भोजन आदि भी बनाया और खाया जा सकता है। इसी प्रकार अन्य सभी प्रकार के धार्मिक व शुभ कार्य भी किए जा सकते हैं। हालांकि शास्त्रों में उपछाया ग्रहण में तंत्र-मंत्र के अनुष्ठान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पंचांग की गणना के अनुसार चंद्र ग्रहण तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में होगा। इस ग्रहण रात्रि 8.45 बजे आरंभ होगा और इसका समापन रात्रि 1.02 बजे होगा। ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 18 मिनट की होगी। इस दिन सर्वाथ सिद्धि योग भी बन रहा है जिसमें आप तंत्र-मंत्र के अनुष्ठान भी संपन्न कर सकते हैं।
यह चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत अटलांटिक, अफ्रीका, अंटार्कटिका और हिंद महासागर में देखा जा सकता है। प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले आरंभ होता है। परन्तु यह एक उपछाया ग्रहण होने के कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
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