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क्या है NASA का 8 महीने का मिशन ISS, जिसके लिए भारतीय मूल के अनिल मेनन ने भरी उड़ान

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आज NASA के मिशन ISS यानी इंटरनेशल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए. अब वो अगले 8 महीने स्पेस में ही बिताएंगे. वहां वो कई एड्वांस्ड रिसर्च करेंगे

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Credit: News24

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आज NASA के मिशन ISS यानी इंटरनेशल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए. अब वो अगले 8 महीने स्पेस में ही बिताएंगे. वहां वो कई एड्वांस्ड रिसर्च करेंगे, जिनका मकसद गहरे अंतरिक्ष यानी Deep space की तलाश करने के लिए इंसानों को तैयार करना है. मेनन इस दौरान सिर्फ रिसर्च ही नहीं करेंगे, बल्कि खुद बतौर टेस्ट सब्जेक्ट काम करेंगे यानी अनिल मेनन के ऊपर भी प्रयोग किए जाएंगे. इस स्पेस यात्रा में उनके साथी हैं प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना

ये भी पढ़ें: कौन हैं भारतीय मूल के अनिल मेनन? जो NASA के ISS मिशन के लिए भरने वाले हैं उड़ान

क्यों खास है ये मिशन?

मेनन स्पेस में माइक्रोग्रैविटी में रहेंगे, जिससे ये पता चलने की उम्मीद है कि लंबे वक्त तक स्पेस में रहने से ह्यूमन बॉडी पर क्या असर पड़ता है. मेनन की रिसर्च NASA के मंगल और चांद जैसे बड़े मिशन के लिए फायदेमंद होगी. ISS मिशन के दौरान AI की मदद से होने वाली अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग पर भी स्टडी होगी. ये तकनीक स्पेस में मौजूद एस्टोनॉट्स के मुश्किल मेडिकल चेकअप के लिए बनाई गई है, ताकि इमरजेंसी के वक्त वो इसका इस्तेमाल कर सकें और उन्हें धरती के डॉक्टर्स की मदद की ज़रूरत ना पड़े. फ्यूचर में ये सिस्टम डीप स्पेस मिशन के दौरान भी काम आ सकता है.

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अनिल मेनन और क्या रिसर्च करेंगे?

मेनन माइक्रोग्रैविटी में हाई-क्वालिटी सेमीकंडक्टर बनाने वाले रिसर्च प्रोग्राम का भी पार्ट बनेंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पेस का माहौल एक परफेक्ट सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन में मदद कर सकता है. इससे पृथ्वी पर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले अगली जनरेशन के कंपोनेंट्स बनाए जा सकते हैं. इस मिशन के दौरान ह्यूमन बॉडी साइंस पर खास ध्यान दिया जाएगा. मेनन खुद इस रिसर्च में हिस्सा लेंगे जिनमें ये पता लगेगा कि ऐसे वातावरण में ब्लड फ्लो, हार्ट रेट और ऑवर ऑल हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा. मिशन ISS के दौरान बायोप्रिंटिंग पर भी रिसर्च होगी, जिसमें माइक्रोग्रैविटी से जटिल बायोलॉजिकल टिश्यू बनाने की प्रोसेस को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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