मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष उस समय शांति की राह पर चल पड़ा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति और ईरान संग समझौता होने का ऐलान किया. ईरान ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे पर सहमति जताई. हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान और अमेरिका के बीच किन-किन मुद्दों को लेकर सहमति बनी है. प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से पहले एमओयू पर हस्ताक्षर हो गया है. आने वाले दो दिनों में डील से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.

MoU पर लगी मुहर


राजनयिक गलियारों में इस एमओयू को एक 'महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट' के रूप में देखा जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रारंभिक समझौता इस बात का संकेत है कि दोनों पक्षों ने उन बुनियादी और विवादित मुद्दों का समाधान निकाल लिया है, जिसके कारण पिछले 100 से अधिक दिनों से दोनों देश युद्ध के मैदान में आमने-सामने थे. हालांकि दोनों ही देशों के विदेश मंत्रालयों ने इस MoU के प्रमुख पॉइन्टस पर अभी पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के सूत्रों ने पुष्टि की है कि इस दस्तावेज पर दोनों पक्षों के शीर्ष वार्ताकारों ने मुहर लगा दी है.

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एक मजबूत ढांचे पर बनी सहमति


यह प्रारंभिक सहमति पत्र (MoU) वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक स्थायी शांति समझौते की ठोस बुनियाद तैयार करता है. हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि कई जटिल और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी आगे की बातचीत होना बाकी है. अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव को कम करने (De-escalation) के लिए एक प्राथमिक ढांचा (Framework) स्थापित करता है. साथ ही, यह उन अनसुलझे तकनीकी मामलों पर द्विपक्षीय बातचीत का रास्ता भी साफ करता है जिन पर अभी सहमति बनना बाकी है.

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महीनों के खूनी संघर्ष के बाद मिली कूटनीतिक कामयाबी


दोनों देशों के बीच यह समझौता पिछले कई महीनों से जारी भीषण जंग के बाद बेहद अहम मोड़ पर आया है. गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे. इसके जवाब में ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाकर कई पलटवार किए, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन गई थी.

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