मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों पर साफ दिखाई दे रहा है. भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस संकट का सबसे ज्यादा असर ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ा है. देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की भारी कमी देखने को मिल रही है, वहीं अब दवाईयों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में फ्यूल संकट लगातार गहराता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर असर पड़ने और खाड़ी इलाके में तेल आपूर्ति में रुकावट होने की वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले ही भारी इजाफा हो चुका है. हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार को ईंधन बचाने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े हैं.
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एलपीजी की कीमतों में उछाल
एलपीजी की बात करें तो इसकी कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है. 11.67 किलो का सिलेंडर, जो पहले लगभग 3150 से 3950 रुपये के बीच मिलता था, अब बढ़कर 3900 से 5135 रुपये तक पहुंच गया है. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है. सिर्फ कीमतें ही नहीं, बल्कि ईंधन का स्टॉक भी तेजी से घट रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास पेट्रोल करीब 27 दिन, डीजल 21 दिन और एलपीजी मात्र 9 दिन का ही स्टॉक बचा है. कच्चे तेल का भंडार भी केवल 11 दिनों के लिए ही पर्याप्त बताया जा रहा है. इस संकट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभावित होना है. ये वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है.
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युद्ध की वजह से बढ़ा खतरा
युद्ध की वजह से इस मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई रुकावट हो रही है. अब इस संकट का असर स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी दिखने लगा है. दवाईयों के कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और सप्लाई में रुकावट होने की वजह से दवाओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे आम लोगों के लिए इलाज महंगा होता जा रहा है. वैश्विक स्तर पर भी इस युद्ध की वजह से दवा उद्योग पर दबाव बढ़ा है और कई जगह प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है. महंगाई, बेरोजगारी और जरूरी चीजों की कमी जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं.
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