ईरान, जिसे इतिहास में फारस के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है. हजारों साल पुराने इस देश का इतिहास कई बड़े युद्धों, साम्राज्यों और राजनीतिक संघर्षों से भरा रहा है. प्राचीन फारसी साम्राज्य से लेकर आधुनिक दौर के ईरान-इराक युद्ध तक, इन लड़ाईयों ने पूरे पश्चिम एशिया और एशिया की राजनीति को प्रभावित किया है. ईरान का इतिहास प्राचीन फारसी साम्राज्य से शुरू होता है. ये साम्राज्य कई शताब्दियों तक पश्चिम एशिया के बड़े हिस्से पर शासन करता रहा. उस समय फारस की सेनाओं ने कई पड़ोसी राज्यों के साथ युद्ध लड़े और अपना प्रभाव बढ़ाया. फारसी साम्राज्य अपने मजबूत सैन्य संगठन और रणनीति के लिए जाना जाता था. इसी ताकत की वजह से फारस उस समय दुनिया की बड़ी शक्तियों में गिना जाता था. ईरान के शासक मुगलों और रोमनों को भी हरा चुके हैं.
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तीन काल में बंटा है ईरान का इतिहास
ईरान का इतिहास कई हजार साल पुराना है, जिसे तीन काल में बांटा गया है. पहला है पूर्व-इस्लामिक काल (लगभग 559 ईसा पूर्व से 651 ईस्वी तक), इस वक्त ईरान का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं था. दूसरा है इस्लामी युग (651 ईस्वी से 1800 ई. तक), इस दौरान अरब ने ईरान पर धावा बोल दिया और फारसी साम्राज्य का अंत हुआ, तीसरा है आधुनिक युग. जानकारी के मुताबिक, मध्य एशिया से आए मेस और पर्शियन समुदाय ने ईरानी पठार पर अपनी जड़े फैला दीं और 559 ईसा पूर्व साइरस द्वितीय ईरान साम्राज्य के पहले शासक बने, जिन्हें फारसी साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है. तब ईरान में लोग पारसी धर्म को मानते थे.
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पहली बार सिकंदर ने किया था कब्जा
फारसी साम्राज्य पर ईसा पूर्व 330 में सिकंदर महान ने हमला किया था. उस वक्त फारसी साम्राज्य को सिकंदर की सेना के सामने घुटने टेकने पड़े. सिकंदर के उत्तराधिकारियों ने ईरान को हेलेनाइज्ड साम्राज्य के अधीन कर लिया और फारसी साम्राज्य का सूरज डूब गया. हेलेनाइज्ड शासकों के बाद ईरान पर रोमन साम्राज्य का राज हुआ. तब पार्थियन नामक ईरानी राजवंश ने रोमनों को लोहा दिया और वो छोटी सी सेना से हार गए. ईरान लंबे समय तक एक के बाद आक्रमणकारियों से जूझता रहा. 11वीं सदी में तुर्कों ने ईरान में एंट्री ली. 13वीं सदी में मंगोल ने ईरान पर हमला किया और 14 वीं सदी में तैमूरलंग ने ईरान को निशाना बनाया.
नादिर शाह का उदय
18वीं सदी में ईरान के इतिहास में एक बड़ा नाम सामने आया, नादिर शाह. वो ईरान के अफशारिद वंश का संस्थापक और बेहद शक्तिशाली शासक माना जाता है. उसने 1736 में ईरान की सत्ता संभाली और कई सैन्य अभियानों के जरिए अपने साम्राज्य का विस्तार किया. नादिर शाह को इतिहास के सबसे सफल सैन्य नेताओं में से एक माना जाता है. उसकी सेना ने मध्य एशिया, काकेशस और अफगानिस्तान तक अभियान चलाए. 1738-39 में नादिर शाह ने भारत पर हमला किया. उस समय भारत में मुगल साम्राज्य कमजोर हो चुका था. नादिर शाह की सेना ने करनाल की लड़ाई में मुगल सम्राट मोहम्मद शाह की सेना को हरा दिया. इस जीत के बाद नादिर शाह दिल्ली पहुंचा और शहर पर कब्जा कर लिया. इतिहासकारों के मुताबिक, इस हमले में दिल्ली को भारी नुकसान हुआ और बड़ी मात्रा में खजाना लूट लिया गया, जिसमें प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा और मयूर सिंहासन भी शामिल थे. इस घटना को भारत के इतिहास के सबसे विनाशकारी विदेशी आक्रमणों में से एक माना जाता है.
ईरान-इराक युद्ध
आधुनिक इतिहास में ईरान का सबसे बड़ा युद्ध 1980 से 1988 तक चला था, जो इराक के साथ लड़ा गया था. इस संघर्ष में लाखों लोग मारे गए और दोनों देशों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. ये युद्ध मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हुआ. आज भी ईरान कई क्षेत्रीय संघर्षों और राजनीतिक तनावों का हिस्सा बना हुआ है. पश्चिम एशिया की राजनीति में उसकी बड़ी भूमिका है और समय-समय पर सैन्य टकराव की स्थिति बनती रहती है. ईरान का इतिहास यह दिखाता है कि यह देश सदियों से युद्ध और सामरिक ताकत के कारण दुनिया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. फारसी साम्राज्य से लेकर नादिर शाह और आधुनिक युद्धों तक, इन संघर्षों ने ईरान की पहचान और उसकी वैश्विक स्थिति को आकार दिया है.
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