अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है. इस बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है. सुरक्षा कारणों के चलते खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार और जनाजे के सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएंगे.

'सुरक्षा एजेंसियां नहीं ले सकतीं रिस्क'

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में बताया कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे. अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मुज्तबा खामेनेई खुद जनता के बीच आना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा अधिकारी इसकी इजाजत नहीं दे रहे हैं.

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इलाही ने बताया, 'मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और वहां मेरे कुछ दोस्तों ने मोजतबा से मुलाकात की थी. मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें अनुमति नहीं दे रही हैं. उनका कहना है कि इस वक्त बाहर आना उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है और वे उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं दे सकते. मुझे लगता है कि वह जनाजे में शामिल नहीं होंगे.'

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US-इजरायल के हमलों में हुई खामेनेई की मौत

अयातुल्ला अली खामेनेई हालिया संघर्ष के शुरुआती चरण में अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार हो गए थे. उनकी मौत के बाद पूरे ईरान में राजकीय शोक घोषित है. तेहरान, कौम और मशहद जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर शोक सभाएं और जुलूस निकाले जा रहे हैं. शिया परंपराओं के तहत देश भर में काले बैनर लगाए गए हैं.

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भारत से सलमान खुर्शीद हुए तेहरान रवाना

ईरान ने इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को आमंत्रित किया है. कांग्रेस पार्टी की ओर से सलमान खुर्शीद तेहरान जा रहे हैं, जो मल्लिकार्जुन खरगे का शोक संदेश ईरानी नेतृत्व को सौंपेंगे. तेहरान रवाना होने से पहले सलमान खुर्शीद ने भारत और ईरान के पुराने रिश्तों को याद किया. उन्होंने कहा, 'मुश्किल वक्त में अपने दोस्त का साथ देना हर इंसान और हर देश का फर्ज है. जब अतीत में पाकिस्तान के मुद्दे पर भारत को वैश्विक मंचों पर दिक्कत आई थी, तब ईरान ने खुलकर हमारा साथ दिया था. आज उनके दुख की इस घड़ी में भारत उनके साथ खड़ा है.'