ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है. ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. ये फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान भेजने की घोषणा की है, जहां इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका की बेफिजूल की मांगों और होर्मुज पर जारी नाकेबंदी को इस बातचीत में शामिल ना होने की वजह बताया है. ईरानी एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा माहौल बातचीत के लिए सही नहीं है और ऐसे हालात में किसी पॉजिटिव नतीजे की उम्मीद करना मुश्किल है.
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पहले भी हुई थी बातचीत
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी कि अमेरिकी डेलीगेशन दूसरे राउंड की बातचीत के लिए इस्लामाबाद जा रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत भी पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में हुई थी, लेकिन वो बिना किसी ठोस नतीजे के फेल हो गई थी. इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी थी. तनाव की एक बड़ी वजह अमेरिका का नौसैनिक प्रतिबंध (नेवल ब्लॉकेड) भी है. ईरान का आरोप है कि ये कदम युद्धविराम समझौते का उल्लंघन है. वहीं अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.
कहां बिगड़ी बात?
दरअसल, लेबनान में हुए सीजफायर के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम की शर्तों के तहत होर्मुज को खोल दिया था. लेकिन जैसे ही अमेरिकी नौसेना ने नाकाबंदी की, ईरान ने इसे अमेरिका का धोखा करार देते हुए कुछ वक्त बाद ही होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया. IRGC का कहना है कि जब तक नाकाबंदी नहीं हट जाती, होर्मुज में जाने की किसी को इजाजत नहीं है. IRGC के इस ऐलान के बाद करीब 23 जहाजों को वापस लौटना पड़ा, जिनमें भारतीय जहाज भी शामिल हैं. ट्रंप ने इस बारे में ईरान को धमकी भी दी कि वो होर्मुज के नाम पर अमेरिका या दुनिया के किसी भी देश को ब्लैकमेल नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को बढ़िया डील दे रहा है और अगर उसने इसे कबूल नहीं किया तो फिर से हमला शुरू करना होगा.
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