ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 85 दिनों तक चले इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद देश में इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश दिया है. इस फैसले के बाद ईरान के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि लंबे समय से वो दुनिया के बाकी हिस्सों से लगभग कट चुके थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री और सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इंटरनेट बहाली के लिए ऑफिशियल मंजूरी दे दी है. ये फैसला साइबर स्पेस से जुड़े उच्चस्तरीय अधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया.

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कब हुआ बैन?

जनवरी 2026 में देशभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के बीच सरकार ने इंटरनेट पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके बाद आम लोगों की पहुंच ग्लोबल इंटरनेट तक लगभग खत्म हो गई थी. कई जगह सिर्फ सरकारी इंट्रानेट या सीमित वेबसाइट्स ही चल रही थीं. इंटरनेट बंद होने से ईरान में ऑनलाइन कारोबार, पढ़ाई और संचार व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा. हजारों छोटे बिजनेस प्रभावित हुए और लोगों को सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने में भारी परेशानी हुई. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ लोग महंगे VPN और वैकल्पिक तकनीकों के जरिए ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे थे.

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क्यों लिया गया फैसला?

ईरान की सरकार लंबे समय से इंटरनेट सेंसरशिप और सोशल मीडिया नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलती रही है. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इंटरनेट ब्लैकआउट का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई की जानकारी बाहर जाने से रोकने के लिए किया गया. हालांकि अब इंटरनेट बहाली का आदेश दे दिया गया है, लेकिन ये साफ नहीं है कि पूरे देश में सामान्य इंटरनेट सेवा पूरी तरह कब तक शुरू होगी. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार आगे भी इंटरनेट पर नियंत्रण बनाए रख सकती है.

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