अमेरिका पर ईरान लगातार हमलावर है और गल्फ देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को टारगेट कर रहा है। कतर, कुवैत, बहरीन में हमलों के बाद बीती रात ईरान ने जॉर्डन को निशाना बनाया। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका के मिलिट्री बेस पर करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने हमले की पुष्टि की ओर दावा किया है कि जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी बेस पर हमला किया गया है, क्योंकि यहां अमेरिकी वायुसेना की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है, जो इलाके में काफी ताकतवर और मजबूत है। इसके खत्म होने से अमेरिका को बहुत बड़ा झटका लगेगा।
ईरान की अमेरिका को दोटूक चेतावनी
बता दें कि ईरान की IRGC ने अमेरिका को दोटूक धमकी दी है कि जब-जब अमेरिका कोई भी आक्रामक कार्रवाई करेगा, उसे पूरे गल्फ क्षेत्र में नुकसान पहुंचाया जाएगा। क्योंकि ईरान की सेना गल्फ देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करती रहेगी। गुरुवार को दिन में कुवैत, कतर और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए थे और रात को जॉर्डन में हमला किया गया। गल्फ देशों से अमेरिका का नाम तक मिटा देगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि वे ईरान में ऐसा विध्वंस मचाएंगे कि घुटनों के बल आकर हमारे गुलाम बन जाएंगे। इस बार ईरान को बहुत बुरा अंजाम भुगतना होगा।
जॉर्डन सेना ने मार गिराई 8 मिसाइलें
जॉर्डन की सेना के अनुसार, सीमा में घुसी 8 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है। हालांकि मिसाइल अटैक में किसी के हताहत होने या किसी तरह का नुकसान होने की कोई खबर नहीं है। जॉर्डन पर हमले अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए किए जा रहे हैं। जॉर्डन और अमेरिका के गहरे सैन्य रिश्ते हैं। मुवाफ्फक साल्टी बेस पर अमेरिकी वायु सेना का एक केंद्र है और वहां करीब 4000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। लेकिन दूसरे देशों की सेनाएं शर्तों के अनुसार ही जॉर्डन की सुविधाओं का इस्तेमाल करती हैं। किसी देश का अपना स्वतंत्र सैन्य ठिकाना या सैन्य कैंपस नहीं, इसलिए हमले से जॉर्डन को नुकसान हुआ।
ईरान के खिलाफ लॉन्चपैड नहीं जॉर्डन
जॉर्डन के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अयमान सफादी ने ईरान ने पहले ही बता दिया था कि वह गल्फ में उन देशों पर हमला करेगा, जहां अमेरिका के मिलिट्री बेस हैं और जहां अमेरिकी सेना तैनात है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देश उसके निशाने पर रहे हैं। फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भरोसा दिलाया था कि जॉर्डन ईरान के खिलाफ मिलिट्री कार्रवाई के लिए लॉन्चपैड का काम नहीं करेगा।युद्ध शुरू होने के बाद जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी बेस पर अमेरिकी सेना और जेट विमानों की तैनाती बढ़ गई।
युद्ध के शुरू ईरान ने जॉर्डन को बार-बार निशाना बनाया। अप्रैल की शुरुआत तक ईरान ने 300 मिसाइलें और ड्रोन दागे थे, जिनमें से ज्यादातर को आसमान में ही ढेर कर दिया गया था। अमेरिका और ईरान की आपसी लड़ाई में जॉर्डन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। जॉर्डन के टूरिज्म सेक्टर को भारी नुकसान हुआ।
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