भारत का देश पाकिस्तान आतंकवाद, कंगाली, भूखमरी, हिंदुओं पर अत्याचार, महिलाओं-बच्चियों के खिलाफ अपराधों को लेकर पूरी दुनिया में बदनाम है. अब पाकिस्तान करीब 12 करोड़ औरतों से जुड़ी एक परंपरा के कारण सुर्खियों में हैं, जिसके तहत साल 2025 में 470 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया. इस परंपरा को 'कारो कारी' या 'कारी' परंपरा कहते हैं, जो भारत में ऑनर किलिंग का एक रूप है. इसके तहत किसी महिला या लड़की को कारी घोषित करके उसे दर्दनाक मौत दी जाती है और उनके दफनाने के लिए कब्रिस्तान भी आम लोगों के कब्रिस्तान से अलग बनाए जातें हैं.
अवैध और प्रेम संबंधों की सजा 'कारी' परंपरा
क्योंकि लड़की या महिला अवैध संबंधों, प्रेम संबंधों, विवाह के बाद पराये मर्द से संबंधों के कारण परिवार की इज्जत पर कलंक लगाती है. इसलिए समाज के प्रतिष्ठित लोग जब लड़की को सजा देते हैं तो परिवार वाले कुछ नहीं कहते. सिंध में इस परंपरा को कारो-कारी , बलूचिस्तान और दक्षिणी पंजाब में सियाह-कारी, खैबर पख्तूनख्वा में तोर तोरा और पंजाब में काला-काली कहा जाता है. प्रॉपर्टी या व्यक्तिगत विवादों को निपटाने के लिए भी इस परंपरा का सहारा लिया जाता है, जबकि पाकिस्तानी कानून में यह परंपरा निषिद्ध है और इसे हत्या करार दिया गया है. बावजूद इसके कई राज्यों में यह परंपरा प्रचलित है.
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ताजा मामले में 20 साल की लड़की की हत्या
ताजा मामला मोहम्मद रमजान की बेटी की हत्या का है. कराची के बाहरी इलाके में बनी सीमेंट की फैक्ट्री में मोहम्मद रमजान नाइट शिफ्ट देते हुए हैं. बीते दिनों फोन आया कि उनकी 20 साल की बेटी खालिदा चंदियो की हत्या कर दी गई है. खालिदा को दक्षिणी सिंध प्रांत में उनके गांव में गोली मारी गई. बेटी की हत्या की बात सुनकर रमजान और उसकी पत्नी नाबुल डर गए. घर लौटकर रमजान ने बेटी की हत्या की वजह जानने का प्रयास किया तो पता चला कि उनकी बेटी को रात के अंधेरे में घर से बाहर बुलाकर गोली मारी गई. उसे गोली मारने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करके वायरल कर दिया गया.
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लड़की को 'कारी' घोषित करने की परंपरा
खालिदा की मां नाबुल बताती हैं कि खालिदा की हत्या उसे 'कारी' घोषित करते हुए की थी. 'कारी' सिंधी भाषा का शब्द है और किसी महिला पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाकर उसे कारी कहा जाता है. इस कारी नामक शब्द का इस्तेमाल करके अकसर समाज और परिवार की इज्जत के नाम पर महिलाओं और लड़कियों की हत्या कर दी जाती है. पुलिस को शक है कि खालिदा को उसके दादा और मामा ने कबीले के एक बुजुर्ग के आदेश पर गोली मारी. पुलिस ने 3 संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन गिरफ्तारी से कुछ नहीं होगा, क्योंकि कारी नामक परंपरा आधे से ज्यादा पाकिस्तान में प्रचलित है.
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खालिदा ने अपने ममेरे भाई से की थी शादी
खालिदा के पिता रमजान बताते हें कि खालिदा ने अपने ममेरे भाई से शादी की थी. उसका पति कराची में एक फैक्ट्री में काम करता था, लेकिन कई महीनों से वह घर नहीं आया. न परिवार वाले उसे तलाश पाए और न ही पुलिस को उसका सुराग मिला. इसलिए खालिदा अपने मायके खैरपुर जिले के एक गांव टंडो मस्ती लौट आई और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी. 10 अप्रैल की रात को खालिदा के पुरुष रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उस पर किसी अन्य पुरुष से संबंध रखने का आरोप लगाया. स्थानीय बुजुर्गों की सभा (जिरगा) में उसे 'कारी' घोषित कर दिया गया और उसे मौत की सजा देने का आदेश सुना दिया.
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अदालतों ने जिरगा सभाओं को बैन किया
जिरगा सभा के आदेश के बाद 3 लोग खालिदा को उसके घर से घसीटकर बाहर ले गए और उसकी हत्या कर दी. अरे, अगर मेरी बेटी ने कुछ गलत किया है तो उन्हें उसे पुलिस के हवाले करना चाहिए था. उसकी हत्या करके इस तरह हमें बेऔलाद और उसके बच्चे को अनाथ करके क्या मिल गया. पाकिस्तान की उच्च अदालतों ने जिरगाओं को प्रतिबंधित किया हुआ है, बावजूद इसके ग्रामीण सिंध इलाकों में यह सभाएं ही महिलाओं से जुड़े विवादों का फैसला करती हैं और आदेश देती हैं, जिसे पूरा इलाका और पीड़िता के परिजन भगवान का आदेश मानकर निभाते हैं, यानी इस परंपरा पर अंधा विश्वास करते हैं.
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हर साल कारी महिलाओं को दी जाती मौत
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) और महिला अधिकार संगठन सिंध सुहाई साथ के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 20 जून 2026 के बीच सिंध में 112 महिलाओं को कारी कहकर मौत दी गई.
पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए, मानवाधिकार संगठन (एचआरसीपी) ने 2025 में पाकिस्तान में कम से कम 470 हॉरर किलिंग दर्ज कीं, जिनमें से 126 सिंध में हुईं. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की संभावना है, विशेष रूप से दूरदराज के जिलों में जहां मौतें दर्ज नहीं की जाती हैं या उन्हें आत्महत्या या दुर्घटना के रूप में गलत तरीके से दर्ज किया जाता है.
सिंध सुहाई साथ का कहना है कि 2024 में सुक्कुर बैराज सिंचाई प्रणाली के गेट से 30 अज्ञात महिलाओं के शव बरामद किए गए थे. उनका मानना है कि इनमें से कुछ महिलाएं हॉरर किलिंग का शिकार हो सकती हैं, हालांकि उनकी मौत के हालात अभी भी स्पष्ट नहीं हैं.
संगठन का कहना है कि कारी के आरोप अभी भी कभी-कभी भूमि, विरासत या कबिलाई प्रतिद्वंद्विता से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. किसी महिला को 'कारी' घोषित किया जा सकता है, किसी सबूत के आधार पर नहीं, बल्कि इसलिए कि यह उसे मारने और संपत्ति जब्त करने या मुआवजा वसूलने का बहाना प्रदान करता है.
कब्रिस्तान भी होते हैं अलग
खालीदा को उसके गांव में ही दफनाया गया, लेकिन उसके परिवार के कब्रिस्तान से दूर. क्योंकि, कारी घोषित महिलाओं को ठीक से कब्र भी नसीब नहीं होती है. उनके लिए अलग से कब्रिस्तान होती है. सिंध के एक पत्रकार का कहना है कि हाल के वर्षों में 'कारी' घोषित महिलाओं के अंतिम संस्कार कम हो गए हैं, लेकिन कब्रिस्तान हिंसा की भयावह याद दिलाता है। जब भी अंतिम संस्कार होते हैं, वे अक्सर रात में किए जाते हैं और कब्रों पर कोई निशान नहीं होता.