दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta को हाल ही में बड़ा झटका लगा है. कंपनी के CEO मार्क जकरबर्ग की संपत्ति में सिर्फ दो दिनों के अंदर करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) की भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट के पीछे 'Big Tobacco' जैसी आशंकाएं बड़ी वजह मानी जा रही है, जहां तंबाकू कंपनियों को भारी कानूनी और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था. रिपोर्ट के मुताबिक, 27 मार्च 2026 तक जुकरबर्ग की नेट वर्थ घटकर करीब 182.5 अरब डॉलर रह गई. ये गिरावट अचानक आई और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया. दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत अमेरिका के न्यू मैक्सिको में आए एक अहम कोर्ट फैसले से हुई.
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अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने पाया कि Meta अपने प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नाबालिगों की सुरक्षा करने में असफल रही, कहा गया था कि उसके एल्गोरिदम कम उम्र के यूजर्स को नुकसानदायक सामग्री दिखाते हैं. मुकदमे की सुनवाई में व्हिसलब्लोअर समेत लगभग 40 गवाहों के बयान शामिल थे और सैकड़ों इंटरनल दस्तावेजों और रिपोर्टों की समीक्षा की गई. पिछले हफ्ते सांता फे की एक अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई. न्यू मैक्सिको की जूरी ने सोशल मीडिया कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों को शिकारियों और हानिकारक कंटेंट के संपर्क में लाकर उन्हें खतरे में डालने का दोषी पाया. कोर्ट ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर का जुर्माना भी लगाया. ये फैसला निवेशकों के लिए बड़ा संकेत बन गया. उन्हें डर है कि आने वाले समय में Meta को और भी कई मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि इस स्थिति की तुलना “Big Tobacco” इंडस्ट्री से की जा रही है.
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कोर्ट के फैसले को चुनौती देगा Meta?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे ही फैसले आगे भी आते रहे, तो सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़े नियम लागू हो सकते हैं. इससे Meta के बिजनेस मॉडल और मुनाफे पर गंभीर असर पड़ सकता है. इतना ही नहीं, मार्च 2026 में Meta की कुल मार्केट वैल्यू में भी 300 अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट आई है. इसका कारण कानूनी जोखिमों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ता खर्च भी बताया जा रहा है. हालांकि Meta ने कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की बात कही है और अपील करने की तैयारी कर रही है. कंपनी का कहना है कि वो अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले का दूसरा चरण 4 मई से शुरू होने वाला है, जहां अदालत मेटा के प्लेटफॉर्म और ऑपरेशन में एडिशनल पैनेल्टी और जरूरी बदलावों पर विचार करेगी.
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