अमेरिका के साथ चल रही तना-तनी के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को साफ तौर पर कहा कि ईरान अपनी ओर से युद्ध की पहल नहीं करना चाहता और हम बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार हैं. साथ ही उन्होंने अपने 'दुश्मनों' को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन पर दबाव बनाने या सरेंडर के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई तो कामयाब कभी नहीं मिलेगी.
वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि तेहरान बातचीत की मेज पर लौटने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले अपनी नाकाबंदी खत्म करनी होगी.
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बता दें, ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री का ये बयान अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की वार्ता के कयासों के बीच आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिए थे कि जल्द ही ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है. हालांकि, उन्होंने यह तो बता दिया था कि वार्ता इस्लामाबाद में होगी, लेकिन कब होगी इसकी जानकारी नहीं दी थी.
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पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11 अप्रैल को शांति वार्ता हुई थी. यह वार्ता करीब 21 घंटे चली थी, लेकिन वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला. अमेरिका की तरफ से उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था. वहीं, ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद-बघेर घलीबाफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था. दोनों पक्षों में देर रात तक काफी लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे.
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बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा था कि हमारी बात नहीं मानी, अब नतीजे देखिए. ट्रंप ने इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रूट समेत ईरान के सभी पोर्ट्स की नाकाबंदी का ऐलान किया था. वहीं, ईरान ने कहा था कि अमेरिका ने हमारी शर्तें नहीं मानी.