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इस रेल रूट पर बिछेगा ऑप्टिक फाइबर का जाल, 1131 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी, जानिए क्या होंगे फायदे

Indian Railways News: इंडियन रेलवे ने 1,131 करोड़ रुपये के 3 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है। इनमें साउथ ईस्टर्न रेलवे पर ऑप्टिक फाइबर कनेक्टिविटी, बिहार में मानसी-सहरसा रेलवे लाइन का डबलिंग और आसनसोल डिवीजन में एक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं, ताकि सेफ्टी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार हो सके.

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Indian Railways Clears Rs 1131 Crore Projects: इंडियन रेलवे ने 1,131 करोड़ रुपये के3 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इनका मकसद कई जोन में कम्युनिकेशन सिस्टम को बेहतर बनाना, ट्रैक की क्षमता बढ़ाना और रेलवे की सुरक्षा को मजबूत करना है. इनमें से एक अहम प्रोजेक्ट में साउथ ईस्टर्न रेलवे के लगभग 1,700 रूट किलोमीटर में एडिशनल 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाना शामिल है. लगभग ₹200 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से चार बड़े डिवीजन में रेलवे कम्युनिकेशन नेटवर्क मजबूत होगा और तेज डेटा ट्रांसमिशन, स्टेशनों के बीच बेहतर तालमेल और बेहतर ऑपरेशनल रिलायबिलिटी में मदद मिलेगी.

ये रेल लाइन होगी डबल

बिहार में, इंडियन रेलवे ने ईस्ट सेंट्रल रेलवे के तहत 44.4 किलोमीटर लंबी मानसी-सहरसा रेलवे लाइन को डबल करने के लिए ₹499 करोड़ की मंजूरी दी है. ये सेक्शन अभी सिंगल-लाइन कॉरिडोर के तौर पर काम करता है और यहां यात्रियों और माल की भारी आवाजाही होती है. इस रूट को डबल करने से लाइन की क्षमता बढ़ने, भीड़ कम होने और ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने की उम्मीद है. इस रूट पर दोनों दिशाओं में लगभग 24 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं और ये गेहूं, मक्का, सीमेंट, खाद, चावल, नमक, रेत और चीनी जैसे सामानों की ढुलाई के लिए भी अहम है.

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इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम को मंजूरी

इंडियन रेलवे ने ईस्टर्न रेलवे के आसनसोल डिवीजन में 27 स्टेशनों और केबिंस में रिले-बेस्ड सिग्नलिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिस्टम लगाने के लिए 432 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी है. इस प्रोजेक्ट में ज्यादा व्यस्त रूटों पर 28 सिग्नलिंग इंस्टॉलेशन को अपग्रेड करना भी शामिल है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक कंप्यूटर-बेस्ड सिग्नलिंग टेक्नोलॉजी है जो पुराने रिले सिस्टम की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद है, इसमें खराबी का पता जल्दी चलता है, मेंटेनेंस आसान है और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है.

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बड़े प्रोग्राम के तहत मंजूरी

ये प्रोजेक्ट इंडियन रेलवे के बड़े मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा हैं. इस प्रोग्राम में बिजी रेल कॉरिडोर पर सुरक्षा और क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कवच (Kavach), ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (CTC) जैसे एडवांस्ड सिस्टम शामिल हैं.

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निष्कर्ष

हाल ही में मंजूर किए गए रेलवे प्रोजेक्ट्स, आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने पर इंडियन रेलवे के लगातार फोकस को दिखाते हैं. कम्युनिकेशन नेटवर्क को मजबूत करके, बिहार में एक बिजी रेलवे लाइन को डबल करके और आसनसोल में सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड करके, इन प्रोजेक्ट्स से सुरक्षा बेहतर होने, भीड़ कम होने और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. ये इंवेस्टमेंट पैसेंजर और माल की आवाजाही दोनों में मदद करेंगे और साथ ही इंडियन रेलवे को भविष्य के लिए एक ज्यादा भरोसेमंद, टेक्नोलॉजी-आधारित ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने में मदद करेंगे.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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