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Viral: महज 18 रुपये साइकिल की कीमत, इतने में तो अब पंचर भी नहीं लगता, देखें बिल

Viral: सोशल मीडिया पर अकसर पुराने बिल वायरल होते हैं। इसी कड़ी में साल 1934 का साइकिल का बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें साइकिल की कीमत महज 18 रुपये लिखी है। 7 जनवरी 1934 का है बिल 89 साल पुराना यह Viral बिल कोलकाता की एक साइकिल दुकान का है। बिल […]

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Viral: सोशल मीडिया पर अकसर पुराने बिल वायरल होते हैं। इसी कड़ी में साल 1934 का साइकिल का बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें साइकिल की कीमत महज 18 रुपये लिखी है।

7 जनवरी 1934 का है बिल

89 साल पुराना यह Viral बिल कोलकाता की एक साइकिल दुकान का है। बिल पर दुकान का नाम कुमुद साइकिल वर्क्स लिखा हुआ है। बिल 7 जनवरी 1934 का है। बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग अपने समय में साइकिल का रेट इससे कम्पेयर कर रहे हैं।

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नेटिजन्स में बिल की चर्चा

Viral बिल पर एक साइकिल की कीमत घंटे समेत कुल 18 रुपये लिखी है। साल 2023 आज के समय में इतने रुपये में चॉकलेट भी नहीं आती है। सोशल मीडिया पर कमेंट में लोग बता रहें हैं कि 1934 में साइकिल शान की सवारी होती थी। साइकिल काफी कम लोगों के पास होती थी। नेटिजन्स इस पोस्ट को काफी पसंद कर रहे हैं। घर की पुरानी साइकिलों के साथ अपने फोटो डाल रहे हैं।

भारतीय करेंसी के बारे में यह जानना जरूरी

भारत में करेंसी का इतिहास करीब 2500 साल पुराना हैं। साल 1917 में 1 रुपया 13 डॉलर के बराबर हुआ करता था। 1948 से 1966 के बीच एक डॉलर 4.66 रूपए के आसपास रहा। 1975 में एक डॉलर 8.39 रूपए, 1985 में एक डॉलर 12 रूपए हो गया। 1991 में बेतहाशा मंहगाई, विकास दर कम होना और फॉरेन रिर्जव कम होने से एक डॉलर 17.90 रूपए पर पहुंच गया। 1993 में एक डॉलर 31.37 रूपए। 2000-2010 के दौरान यह एक डॉलर की कीमत 40-50 रूपए तक पहुंच गई। 2013 में तो यह हद पार हो गई और यही एक डॉलर की कीमत 65.50 रूपए तक पहुंच गई।

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First published on: Mar 10, 2023 07:37 PM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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