नहीं रहे बंगाल के प्रसिद्ध साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी, 93 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; CM ममता ने जताया शोक

बंगाल के प्रसिद्ध साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी (शंकर) का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह कोलकाता के पेयरलेस अस्पताल में इलाजरत थे. बढ़ती उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उनकी तबीयत काफी समय से खराब चल रही थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. पढ़ें पश्चिम बंगाल से अमर देव पासवान की रिपोर्ट.

Mani Shankar Mukherjee

बंगाल के प्रसिद्ध साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी (शंकर) का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह कोलकाता के पेयरलेस अस्पताल में इलाजरत थे. बढ़ती उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उनकी तबीयत काफी समय से खराब चल रही थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.

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मणि शंकर मुखर्जी का जन्म 7 दिसंबर 1933 को हुगली जिले के हिंदमोटर में हुआ था. वह एक प्रतिष्ठित लेखक, उपन्यासकार, निबंधकार और शोधकर्ता थे. उन्होंने स्वामी विवेकानंद पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं और अनेक चर्चित बंगाली उपन्यासों की रचना की, जो आज भी पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

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संघर्ष से शिखर तक का सफर

शंकर के पिता का निधन तब हो गया था जब वह किशोर अवस्था में थे. आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के अंतिम ब्रिटिश बैरिस्टर नोएल फ्रेडरिक बारवेल के यहां क्लर्क के रूप में कार्य किया. इसी दौरान उन्होंने सुरेंद्रनाथ कॉलेज (पूर्व में रिपन कॉलेज) में अध्ययन भी किया.

जीवनयापन के लिए उन्होंने टाइपराइटर ऑपरेटर, सफाईकर्मी, निजी ट्यूटर और फेरीवाले के रूप में भी काम किया. नोएल बारवेल की अचानक मृत्यु के बाद शंकर ने उनकी स्मृति में ‘कतो अजनारे’ नामक पुस्तक लिखी, जिसे पाठकों ने बेहद सराहा.

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इसके बाद 1962 में प्रकाशित उनका चर्चित उपन्यास ‘चौरंगी’ ने उन्हें नई पहचान दी. इस उपन्यास पर 1968 में एक कल्ट फिल्म भी बनी, जिसने साहित्य और सिनेमा दोनों जगत में इतिहास रच दिया.

उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में ‘सीमाबुद्ध’, ‘जनअरण्य’ सहित कई उपन्यास शामिल हैं, जिन्होंने आम आदमी के जीवन संघर्ष को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया.

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पुरस्कार और सम्मान

मणि शंकर मुखर्जी को उनकी आत्मकथात्मक कृति ‘एक एक एकाशी’ के लिए 18 मार्च 2021 को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 2021 में उनकी पुस्तक ‘सुबर्णो सुजोग’ के लिए उन्हें फरहा ब्लू काजी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ. उन्हें बंकिम पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका था.

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, ‘मशहूर बंगाली लेखक मणिशंकर मुखर्जी (शंकर) के निधन से मुझे बहुत दुख हुआ है. उनके जाने से बंगाली साहित्य की दुनिया का एक चमकता सितारा डूब गया है. ‘चौरंगी’ से लेकर ‘कतो अजनारे’ तक, ‘सीमाबुद्ध’ से लेकर ‘जनअरण्य’ तक उनकी अमर रचनाओं ने पीढ़ियों के पाठकों को प्रभावित किया है. आम आदमी के जीवन के संघर्ष की अनकही कहानियां उनकी लेखनी से जीवंत हुई हैं. उनका जाना हमारी सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है. मैं उनके शोक संतप्त परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं.’

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मणि शंकर मुखर्जी का निधन बंगाली साहित्य जगत के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है. उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए साहित्यिक धरोहर के रूप में सदैव मार्गदर्शन करती रहेंगी.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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