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TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर फैसले में कितना वक्त…? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी टाइमलाइन

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न ‘घास-फूल’ को फ्रीज किए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. अदालत ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसले के लिए एक निश्चित और वाजिब समयसीमा मांगी है. कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव कार्यक्रम के बीच ऐसा फैसला लेकर आयोग ने विकल्प सीमित कर दिए हैं.

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न ‘घास-फूल’ को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है. शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग (EC) से सीधा सवाल किया कि पार्टी के नाम और सिंबल विवाद पर अंतिम निर्णय लेने में उसे कितना समय लगेगा. कोर्ट ने आयोग को एक स्पष्ट और वाजिब समयसीमा तय कर बताने का निर्देश दिया है. गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस में दो फाड़ होने के बाद चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश के जरिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और मूल चुनाव चिह्न ‘घास-फूल’ को फ्रीज कर दिया था. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अंतरिम व्यवस्था के तौर पर चुनाव चिह्न आवंटन को लेकर जो हालिया आदेश पारित किया गया था, उसे ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इसी याचिका पर अदालत के समक्ष सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है.

यह भी पढ़ें: नाम-चुनावी सिंबल मामला: ममता बनर्जी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, ECI के फैसले को दी चुनौती

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कपिल सिब्बल ने उठाए फैसले की टाइमिंग पर सवाल

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आयोग के फैसले की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि आयोग के पास यह फैसला जुलाई में लेने का अवसर था, लेकिन चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद यह आदेश दिया गया. इससे पार्टी के पास कानूनी राहत पाने का समय बेहद सीमित हो गया. सिब्बल ने दलील दी कि यदि ऐसी मिसाल बनी, तो भविष्य में भी चुनावों से ठीक पहले ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं. उन्होंने मांग की कि आयोग अक्टूबर के भीतर ही इस पर अंतिम फैसला सुनाए.

चुनाव आयोग का पक्ष और कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने शिवसेना विवाद का हवाला देते हुए कहा कि देरी के गंभीर असर देखने को मिलते हैं. हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील एनके कौल ने तुरंत समयसीमा बांधने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि आयोग को दोनों गुटों के दस्तावेज, साक्ष्य और दावों की गहन जांच करनी होती है, इसलिए एक महीने की डेडलाइन तय करना व्यावहारिक नहीं होगा.

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क्या है पूरा विवाद?

पार्टी में दो फाड़ होने के बाद चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश के जरिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और मूल चुनाव चिह्न ‘घास-फूल’ को फ्रीज कर दिया था. आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम व ‘फुटबॉल प्लेयर’ सिंबल दिया है, जबकि दूसरे धड़े को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है.

यह भी पढ़ें: ‘ज्ञानेश कुमार ने जहां-जहां चुनाव कराए वहां दोबारा हों इलेक्शन’, CEC विवाद पर बोलीं ममता बनर्जी

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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