पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सातवें वेतन आयोग के गठन की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्यपाल आर. एन. रवि ने सातवें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशें तैयार करने के लिए चार सदस्यीय हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है.
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क्या है खास?
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस समिति का मकसद राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों तथा अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और बाकी वित्तीय सुविधाओं की समीक्षा करना है. समिति अपनी रिपोर्ट के आधार पर सरकार को नई वेतन संरचना लागू करने संबंधी सिफारिशें देगी. समिति के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अतनु चक्रवर्ती को नियुक्त किया गया है. अतनु चक्रवर्ती केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं. वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह अहम दायित्व सौंपा गया है.
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किसे मिली बड़ी जिम्मेदारी?
समिति में नीति अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. पार्थ मुखोपाध्याय को सदस्य बनाया गया है. वहीं, आईआईएम कोलकाता के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. पार्थ प्रतिम पाल भी समिति के सदस्य होंगे. समिति के सदस्य-सचिव के रूप में पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त विभाग के सचिव और आईएएस अधिकारी देवी प्रसाद करणम जिम्मेदारी निभाएंगे. आपको बता दें कि साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सातवें वेतन आयोग का मुद्दा प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहा था. भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के सरकारी कर्मचारियों से सातवां वेतन आयोग लागू करने का वादा किया था.
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पीएम मोदी ने की थी घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनावी सभाओं के दौरान राज्य की जनता के लिए कई प्रमुख गारंटियों की घोषणा की थी. इनमें सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का गठन और नई वेतन व्यवस्था लागू करना प्रमुख वादा था. इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनावी मंच से कहा था कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. राज्य सरकार ने मई महीने में सातवें वेतन आयोग के गठन का फैसला लिया था. अब राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद आयोग के गठन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आगे बढ़ गई है. माना जा रहा है कि समिति अपनी विस्तृत समीक्षा के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर नई वेतन संरचना तैयार की जाएगी.
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क्या है मकसद?
आर्थिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने से सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है. महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए), चिकित्सा भत्ता तथा अन्य सभी प्रकार के भत्तों की नई दरें तय की जा सकती हैं. इसके साथ ही मूल वेतन की संरचना भी नए सिरे से निर्धारित होगी.नई वेतन व्यवस्था लागू होने से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है. इसका लाभ केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेंशनभोगियों को भी संशोधित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ मिलने की उम्मीद है.
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सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि सातवें वेतन आयोग का मुख्य उद्देश्य वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का पुनर्गठन करना है, ताकि उन्हें बेहतर वित्तीय सुरक्षा और जीवन स्तर मिल सके. इसके अलावा स्वायत्त संस्थाओं तथा सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को भी इस प्रक्रिया का लाभ मिल सकता है. सरकारी कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत किया है. उनका कहना है कि लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग की जा रही थी और अब आयोग के गठन से उम्मीद जगी है कि कर्मचारियों को जल्द ही संशोधित वेतन और भत्तों का फायदा मिलेगा.
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