कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक जनसभा में बांग्लादेशी कार्यकर्ता की हत्या को लेकर की गई कथित टिप्पणियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है. अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि यह याचिका जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करने योग्य नहीं थी. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र विट्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए इसे निरस्त कर दिया. इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें साफ किया गया था कि जनसभा के दौरान दिए गए उनके बयानों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है.
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अदालत ने PIL के इस्तेमाल पर उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि एक सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल अब एक “खास औजार या हथियार” के तौर पर किया जाने लगा है, जो इसकी मूल भावना के खिलाफ है.
याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने दिसंबर 2025 में ढाका में हुई बांग्लादेशी कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं. याचिकाकर्ता का दावा था कि इन बयानों का भारत के राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल असर पड़ा है. हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को जनहित याचिका के मानकों पर सही नहीं माना और मामले को खारिज कर दिया.
ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी TMC विधायकों को नोटिस
पश्चिम बंगाल में TMC के दोनों गुटों के बीच सियासी जंग अब सीधे विधानसभा और अदालतों के गलियारों में पहुंच गई है. विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों को नोटिस जारी कर एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. यह नोटिस ममता बनर्जी गुट द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर भेजा गया है. नोटिस मिलते ही ऋतब्रत बनर्जी ने ममता खेमे पर तीखा हमला बोला और सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ दायर याचिका के कानूनी आधार पर ही सवाल उठा दिए.
सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद जारी हुआ नोटिस
ममता गुट के वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसके ठीक बाद विधानसभा सचिवालय की तरफ से ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, शोभन मित्रा और अखरुज्जमां अंसारी समेत 10 विधायकों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया. बागी खेमे के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि ममता गुट को इसमें खुश होने की जरूरत नहीं है, वे समय पर इसका कानूनी जवाब देंगे.
65 विधायकों के समर्थन का दावा
ममता बनर्जी गुट का आरोप है कि इन बागी विधायकों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेकर दलबदल कानून का उल्लंघन किया है, इसलिए इनकी विधानसभा सदस्यता तुरंत रद्द होनी चाहिए. दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का दावा है कि उनके पास 80 में से 65 विधायकों का पूर्ण समर्थन हासिल है. ऐसे में असली ताकत उनके साथ है और उनके खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव की रणनीति है.
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