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ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत, टिप्पणी के खिलाफ जनहित याचिका खारिज

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी द्वारा बांग्लादेशी कार्यकर्ता मामले में दी गई टिप्पणी के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह याचिका जनहित याचिका के दायरे में स्वीकार्य नहीं थी. राज्य सरकार पहले ही अपनी रिपोर्ट में कह चुकी थी कि इस बयान से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता.

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी द्वारा बांग्लादेशी कार्यकर्ता मामले में दी गई टिप्पणी के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. File Photo

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक जनसभा में बांग्लादेशी कार्यकर्ता की हत्या को लेकर की गई कथित टिप्पणियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है. अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि यह याचिका जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करने योग्य नहीं थी. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र विट्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए इसे निरस्त कर दिया. इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें साफ किया गया था कि जनसभा के दौरान दिए गए उनके बयानों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है.

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अदालत ने PIL के इस्तेमाल पर उठाए थे सवाल

गौरतलब है कि एक सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल अब एक “खास औजार या हथियार” के तौर पर किया जाने लगा है, जो इसकी मूल भावना के खिलाफ है.
याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने दिसंबर 2025 में ढाका में हुई बांग्लादेशी कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं. याचिकाकर्ता का दावा था कि इन बयानों का भारत के राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल असर पड़ा है. हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को जनहित याचिका के मानकों पर सही नहीं माना और मामले को खारिज कर दिया.

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ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी TMC विधायकों को नोटिस

पश्चिम बंगाल में TMC के दोनों गुटों के बीच सियासी जंग अब सीधे विधानसभा और अदालतों के गलियारों में पहुंच गई है. विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों को नोटिस जारी कर एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. यह नोटिस ममता बनर्जी गुट द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर भेजा गया है. नोटिस मिलते ही ऋतब्रत बनर्जी ने ममता खेमे पर तीखा हमला बोला और सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ दायर याचिका के कानूनी आधार पर ही सवाल उठा दिए.

सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद जारी हुआ नोटिस

ममता गुट के वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसके ठीक बाद विधानसभा सचिवालय की तरफ से ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, शोभन मित्रा और अखरुज्जमां अंसारी समेत 10 विधायकों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया. बागी खेमे के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि ममता गुट को इसमें खुश होने की जरूरत नहीं है, वे समय पर इसका कानूनी जवाब देंगे.

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65 विधायकों के समर्थन का दावा

ममता बनर्जी गुट का आरोप है कि इन बागी विधायकों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेकर दलबदल कानून का उल्लंघन किया है, इसलिए इनकी विधानसभा सदस्यता तुरंत रद्द होनी चाहिए. दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का दावा है कि उनके पास 80 में से 65 विधायकों का पूर्ण समर्थन हासिल है. ऐसे में असली ताकत उनके साथ है और उनके खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव की रणनीति है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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