FIR against Anuj Chaudhary inside story: उत्तर प्रदेश के संभल में पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के अचानक तबादले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है. इस ट्रांसफर को लेकर सवाल उठ रहे हैं, कुछ लोग इस ट्रांसफर के आदेश को बदले की कार्रवाई मान रहे हैं तो कुछ ने इसे रूटीन प्रक्रिया बताया है. कुलमिलाकर संभल में 2024 के दौरान हुई हिंसा, फर्जी एनकाउंटर के आरोप और प्रशासनिक टकराव की इस कहानी ने पूरे यूपी को हिला दिया. आइए जानते हैं 2024 से अब तक की पूरी टाइमलाइन, जहां पुलिस और न्यायपालिका के बीच की जंग ने नया मोड़ ले लिया.

मामले की शुरुआत: संभल हिंसा और पुलिस फायरिंग

संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को भड़की हिंसा ने सबको चौंका दिया. इस दौरान पुलिस की फायरिंग में कई लोग घायल हुए, जिसमें एक युवक को तीन गोलियां लगने का आरोप लगा. नखासा थाना क्षेत्र के रहने वाले यामीन ने दावा किया कि उसका बेटा जामा मस्जिद इलाके में ठेले पर रस्क-बिस्किट बेच रहा था, जब पुलिस ने फायरिंग की. यामीन ने तत्कालीन ASP अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर आरोप लगाए. इस घटना ने पहले ही न्यायिक जांच को जन्म दिया, लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी

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CJM विभांशु सुधीर का कार्यभार और सख्त फैसले

विभांशु सुधीर ने 18 सितंबर 2025 को संभल में CJM का पदभार ग्रहण किया. कुछ महीनों में ही विभांशु सुधीर ने ऐसे फैसले सुनाए, जिनसे पुलिस महकमे में हलचल मच गई. 24 दिसंबर 2025 को सुनाए पहले फैसले में 2024 की संभल हिंसा के मामले में CJM ने तत्कालीन बहजोई थाना प्रभारी पंकज लवानिया, चार इंस्पेक्टरों और दो दारोगाओं समेत 13 पुलिसकर्मियों पर फर्जी एनकाउंटर का केस दर्ज करने का आदेश दिया. पुलिस से 3 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई. इसी साल 6 जनवरी को यामीन की याचिका पर शुरू हुई सुनवाई में संभल हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग का जिक्र था तो 9 जनवरी को CJM ने बड़ा आदेश जारी करते हुए ASP अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए. आदेश 12 जनवरी को सार्वजनिक हुआ.

पुलिस का विरोध और हाईकोर्ट की चुनौती

CJM के इन फैसलों से पुलिस को इसलिए बैकफुट पर ला दिया, क्योंकि पहले ही इस मामले में न्यायिक जांच हो चुकी थी. 13 जनवरी 2026 को संभल के SP कृष्ण कुमार विश्नोई ने खुलकर बयान देते हुए FIR दर्ज करने से इनकार कर CJM के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही. उनका तर्क था कि दोबारा केस दर्ज करना उचित नहीं, क्योंकि न्यायिक जांच पहले ही हो चुकी है. इस बयान ने टकराव को और बढ़ा दिया और सवाल उठे कि क्या पुलिस न्यायिक आदेशों की अवहेलना कर रही है?

अचानक ट्रांसफर और विवाद का नया मोड़

इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 20 जनवरी की रात को जारी हुए प्रशासनिक आदेश में 14 न्यायिक अधिकारियों का तबादला किया, जिसमें CJM विभांशु सुधीर का नाम शामिल था. उन्हें संभल से सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया. दिलचस्प बात यह कि FIR दर्ज करने की समय-सीमा 22 जनवरी को पूरी होने वाली थी, कई लोग इसे 'डिमोशन' के रूप में देख रहे हैं, और आरोप लगा रहे हैं कि यह पुलिस के खिलाफ फैसलों का नतीजा है. नए CJM के रूप में चंदौसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज आदित्य सिंह को नियुक्त किया गया.

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