Balraj Singh
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Jyoti Maurya Case Update, प्रतापगढ़: अवैध संबंधों से सुर्खियों में बने उत्तर प्रदेश की पीसीएस ज्योति मौर्य और उनके सफाई कर्मचारी आलोक मौर्य के विवाद में नया मोड़ आ गया। आलोक मौर्य आए तो अपनी अफसर बीवी के खिलाफ सबूत देने थे, मगर दे कुछ और ही गए। इसके बाद अब हर कोई इस असमंजस में है कि आलोक ने ऐसा क्या कर दिया और अब इसका अगला असर क्या होगा?
देशभर के कई दंपतियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा होने का मौका दे चुके इस मामले में अभी तक की जानकारी के मुताबिक 2010 में प्रतापगढ़ के रहने वाले पंचायती राज विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आलोक मौर्य की शादी ज्योति मौर्य के साथ हुई थी। आलोक ने पत्नी को पढ़ाया-लिखाया और इसके बूते 2015 में वह एसडीएम बन गईं। उसी दौरान जुड़वां बेटियों को भी जन्म दिया।
इसी साल आलोक मौर्य ने अपनी अफसर बीवी ज्योति मौर्य के खिलाफ PCS अफसर बनने के बाद करोड़ों की संपत्ति बनाने का आरोप लगा शिकायत दे दी। इसी के साथ आलोक मौर्य ने ज्योति मौर्य पर होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के साथ अवैध संबंध रखने का भी आरोप जड़ा। इस शिकायत के मुताबिक आलोक ने ज्योति और मनीष दुबे को रंगे हाथ पकड़ने का भी दावा किया था। दूसरी ओर ज्योति मौर्य ने भी धूमनगंज थाने में आलोक मौर्य पर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था।
इस मामले में प्रयागराज के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने एडिशनल कमिश्नर प्रशासन अमृतलाल बिंद, एडीएम प्रशासन हर्ष देव पांडेय और एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट जयजीत कौर की एक जांच कमेटी बनाई। अगस्त के पहले हफ्ते में इस कमेटी ने आलोक के बयान दर्ज करने थे तो आलोक ने 20 दिन में सबूत दे देने की बात कही थी। कमेटी ने 28 अगस्त को आलोक को फिर बुलाया था। आज सबूत देने की बजाय आलोक मौर्य ने शिकायत वापस लेकर सारा खेल ही पलट दिया। दोपहर लगभग 3 बजे कमिश्नर ऑफिस में पहुंचे आलोक ने एक लिखित पत्र दिया और 15 मिनट बाद ही बाहर आकर इसकी पुष्टि कर दी।
हालांकि शिकायत वापस ले लेने की वजह पर आलोक ने कोई भी टिप्पणी नहीं की। आलाेक ने मीडिया के सामने सिर्फ इतना ही कहा, ‘मैंने अपनी शिकायत वापस ले ली है। मैं इस प्रकरण पर आगे नहीं जाना चाहता हूं। मेरे ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं है’। दूसरी ओर इस मामले में अंदरखाते अंदाजा लगाया जा रहा है कि ज्योति और आलोक के बीच गुपचुप समझौता हुआ है, जिसके चलते आलोक ने शिकायत वापस ले ली और जल्द ही ज्योति भी कुछ ऐसा ही करने वाली हैं।
इसी के साथ प्रशासनिक तौर पर सोचें तो भले ही आलोक ने अपनी फजीहत कम करने की एक कोशिश कर ली, लेकिन अभी यह मामला खत्म नहीं हुआ है। जानकारों की मानें तो आलोक के आरोप छोटे नहीं हैं। ऐसे में अब कार्रवाई आगे बढ़ने और नहीं बढ़ाने वाले फैसले की गेंद शासन के पाले में है।
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