क्या है व्यास का तहखाना? सर्वे रिपोर्ट में ऐसा क्या जिसके आधार पर मिली पूजा की अनुमति

Gyanvapi News: व्यास के तहखाना में साल 1993 तक हिंदू पक्ष के लोग पूजा-अर्चना करते थे। विवाद के चलते नवंबर 1993 में राज्य सरकार ने पूजा बंद करवा दी थी।

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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर

Gyanvapi News: ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा की अनुमति मिलने के बाद पूरे देश की नजर वाराणसी पर टिक गई है। अगले सात दिन में यहां पूजा और व्यास जी के तहखाने में प्रवेश के सभी इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे। इससे पहले बुधवार रात कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के लिए तहखाने में जिला प्रशासन और वकीलों की उपस्थिति में पूजा अर्चना की गई। गुरुवार सुबह तीन बजे से ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग व्यास के तहखाने में जाने और पूजा करने के लिए खड़े हैं।

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क्या है व्यास जी का तहखाना

जानकारी के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में भगवान नंदी हैं। नंदी जी के सामने व्यास का तहखाना है। इसी जगह साल 1993 तक हिंदू पक्ष के लोग पूजा-अर्चना करते थे। विवाद के चलते नवंबर 1993 में राज्य सरकार ने पूजा बंद करवा दी थी। उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार थी। फिलहाल 31 सालों से इसमें किसी को जाने की अनुमति नहीं है। हाल ही में कोर्ट के निर्देश के बाद एएसआई ने यहां सर्वे किया था। इस सर्वे रिपोर्ट के बाद ही व्यास के तहखाने में अदालत ने पूजा की अनुमति दी है।

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मस्जिद को दो चरणों में बनाया गया है

सर्वे रिपोर्ट के बाद व्यास के तहखाने में साफ-सफाई की गई है। एएसआई ने यह रिपोर्ट अदालत के समक्ष जमा करवाई है। जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गा है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यहां पुराने ढांचे के ऊपर ही मस्जिद को बनाई  गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस मस्जिद को दो चरणों में बनाया गया है। जिसमें पहले पश्चिमी दिशा में गुंबद और मीनार बने। फिर आगे का निर्माण किया गया।

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लेखक के बारे में

Amit Kasana

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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