गर्मियों की छुट्टियों या वीकेंड्स पर दिल्ली-एनसीआर से नैनीताल, अल्मोड़ा और कुमाऊं के खूबसूरत पहाड़ों की सैर पर निकलने वाले पर्यटकों और अन्य लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों को जोड़ने वाले एक बिल्कुल नए 100 किलोमीटर लंबे फोर-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है. इस बेहद खास प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बाद दिल्ली से नैनीताल जाने वाले यात्रियों का सफर न सिर्फ आसान होगा, बल्कि यात्रा के समय में भी 1 से 1.5 घंटे तक की बड़ी कटौती होगी. अभी इस रूट पर सफर करने से मुरादाबाद-रुद्रपुर रूट पर सैलानियों को घंटों लंबे थकाऊ जाम का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के आने से पहाड़ों का यह सफर फुल स्पीड और बेहद आरामदायक होने जा रहा है.
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क्यों खास है ये एक्सप्रेसवे?
इस हाईवे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पुरानी और संकरी सड़कों को चौड़ा करने के बजाय पूरी तरह से एक नया रास्ता (Greenfield Route) तैयार किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, यह एक 'कंट्रोल्ड एक्सेस' एक्सप्रेसवे होगा, जिसका सीधा मतलब है कि इस मार्ग पर स्थानीय वाहनों का दखल बहुत कम होगा और गाड़ियां बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार में दौड़ सकेंगी.
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सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे रुद्रपुर, किच्छा, लालकुआं, पंतनगर और बहेड़ी जैसे बेहद व्यस्त और भारी भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक शहरों को पूरी तरह बाईपास (Bypass) कर देगा. इन शहरों के बाहर से निकलने के कारण यात्रियों को शहर के आंतरिक ट्रैफिक और जाम में नहीं फंसना पड़ेगा, जिससे उनके समय के साथ-साथ वाहनों के ईंधन की भी भारी बचत होगी.
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शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ने पर लखनऊ से भी घटेगी दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया हाई-स्पीड कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के बरेली से शुरू होकर सीधे हल्द्वानी तक पहुंचेगा, जिसे कुमाऊं के पहाड़ों का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. वहीं एनएचएआई इस नवनिर्मित हाईवे को बरेली-मुरादाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख कनेक्टिविटी मार्गों से भी जोड़ेगा ताकि अलग-अलग शहरों से आने वाले वाहनों को इस पर चढ़ने में आसानी हो. सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और मध्य यूपी के लोगों के लिए भी गेमचेंजर साबित होगा. भविष्य में इस रूट को शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से भी लिंक करने की योजना है, जिससे लखनऊ से सीधे नैनीताल की दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी.
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इस मेगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से होंगे ये 5 बड़े बदलाव
- दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की तर्ज पर तैयार हो रहा यह बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे आने वाले सालों में उत्तराखंड के पर्यटन और रोजगार की पूरी दिशा बदल देगा, जिससे जुड़े 5 सबसे महत्वपूर्ण फायदे नीचे दिए गए हैं:
- नियमित रूप से सफर करने वाले स्थानीय नागरिकों और निजी वाहन मालिकों के लिए एक विशेष टोल पास स्कीम लागू की जा सकती है, जिसके तहत एकतरफा सफर का औसत खर्च मात्र ₹15 के करीब आएगा.
- आसान और जाम-मुक्त कनेक्टिविटी होने की वजह से दिल्ली के पर्यटक वीकएंड पर बिना किसी झंझट के बेहद कम समय में सीधे कुमाऊं के हिल स्टेशनों तक पहुंच सकेंगे.
- इस नए चौड़े हाईवे पर शिफ्ट किए जाने से पुराने मुरादाबाद रूट की सड़कों पर हादसों का ग्राफ काफी नीचे गिर जाएगा.
- हल्द्वानी, सिडकुल पंतनगर और बरेली के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही मात्र कुछ ही घंटों में बेहद आसानी से हो सकेगी, जिससे ईंधन का खर्च और समय दोनों बचेगा.
- चूंकि यह नई सड़क बिल्कुल अलग और खाली जमीन पर बनाई जा रही है, इसलिए इसके काम के दौरान पुराने हाईवे के सामान्य यातायात पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा साथ ही जिन इलाकों से यह गुजरेगा वहां प्रोपर्टी के दाम में भी अच्छा उछाल आएगा.
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