साल 2004 में सैफई महोत्सव के दौरान करंट लगने के मामले में पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं दिए जाने के आरोप में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और उनके निजी सचिव के खिलाफ सुलतानपुर की सांसद-विधायक अदालत में मुकदमा दायर किया गया है. मामले में सुनवाई सात नवंबर को होगी. पीड़ित पक्ष के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बुधवार को बताया कि परिवाद में अखिलेश और उनके निजी सचिव गजेंद्र सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है. उन्होंने बताया कि अदालत ने संबंधित थाने से रिपोर्ट तलब की है.
शुक्ला के मुताबिक, दिसंबर 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और सांसद अखिलेश यादव के निर्देश पर सैफई महोत्सव के दौरान बिजली विभाग द्वारा काम कराया जा रहा था और इसी दौरान बिजली के खुले तारों की चपेट में आने से करंट लगने के कारण मोहम्मद अली समेत तीन लोग झुलस गए थे, जिनमें दो की मौके पर ही मौत हो गई थी.
उन्होंने बताया कि हादसे में झुलसे जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के सुरौली गांव के निवासी मोहम्मद अली के परिवार को पार्टी कोष से मुआवजे और इलाज के लिए 15 लाख, पांच हजार रुपये देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन परिवार को अब तक यह रकम नहीं मिली.
शुक्ला ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को घटना की जानकारी थी और उनके हस्ताक्षर वाला मुआवजे का चेक भी जारी किया गया था, जबकि संबंधित खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं थी.
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अखिलेश के निजी सचिव गजेंद्र ने मोहम्मद अली का फर्जी या नया मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था, जिस पर उनके हस्ताक्षर हैं.
वकील ने बताया कि इस मामले में पहले उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अदालत में राहत मांगने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सांसद/विधायक अदालत में आवेदन दाखिल किया गया. उन्होंने बताया कि मामले की अगली सुनवाई सात नवंबर को निर्धारित की गई है.
इन आरोपों पर अखिलेश यादव या उनके निजी सचिव की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.