क्या आप यकीन करेंगे कि 10×15 साइज की एक साधारण दरी की कीमत 8,370 रुपये हो सकती है? सुनने में यह किसी मजाक जैसा लगता है, लेकिन राजस्थान विधानसभा में उठा एक सवाल बताता है कि सरकारी स्कूलों की दरी भी कभी-कभी सियासत और शक के घेरे में आ जाती है। दरअसल, मामला नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र का है।
दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान डेगाना के विधायक अजय सिंह ने ऐसा सवाल उठाया कि सदन भी चौंक गया। उन्होंने पूछा कि साल 2019 से 31 दिसंबर 2023 के बीच डेगाना क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए दरी-पट्टियों की खरीद कैसे और किन शर्तों पर हुई? किस दुकान से खरीदी गई और इतनी महंगी क्यों?
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विधायक का आरोप था कि बिना मांग के ही स्कूलों को दरी भेज दी गईं। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों ने जब इन्हें लेने से मना किया तो वहां के शिक्षकों और प्रिंसिपलों के तबादले तक करा दिए गए। यानी दरी सिर्फ बिछी नहीं… बिछाई भी गई।
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जब इस पूरे मामले पर शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर से जवाब मांगा गया तो शुरुआती जांच में गड़बड़ी की बात खुद सरकार ने भी स्वीकार की। मंत्री ने बताया कि रेकॉर्ड में 171 दरियों की खरीद बिना टेंडर के दिखाई गई लेकिन 101 दरिया ही बांटी गईं। इसका भी भुगतान 8,370 रुपये प्रति दरी के हिसाब से किया गया। यानी सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
मंत्री मदन दिलावर ने सदन को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही उस समय के तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को निलंबित करने की घोषणा भी कर दी गई।
हालांकि सवाल यहीं खत्म नहीं हुआ। विधायक ने यह भी पूछ लिया कि जिस समय यह खरीद हुई, उस वक्त के विधायक विजयपाल मिर्धा का नाम भी सामने आ रहा है और अब वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं।ऐसे में क्या उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
सरकार की ओर से जवाब छोटा था, लेकिन मायने बड़े हैं,जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”अब सवाल यह है कि यह दरी सिर्फ स्कूलों के फर्श पर बिछी थी या उसके पीछे कोई बड़ा खेल भी बिछा हुआ था। जवाब शायद जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि राजस्थान की राजनीति में दरी भी कभी-कभी बड़ी कहानी बन जाती है।
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