राजस्थान में इस विभाग का मंत्री नहीं जीत पाता अगला चुनाव, 1993 से शुरू हुआ मिथक 2018 तक बदस्तूर जारी

Rajasthan Election Result 2023: राजस्थान चुनाव को लेकर जारी हुए एग्जिट पोल के बाद दोनों ही पार्टियों के बड़े नेता लगातार चुनावी बैठकें करने में व्यस्त हैं। इस बीच कई सियासी मिथक है जो खास से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हैं।

Rajasthan Election Result 2023 Special Story

Pratap Singh Khariyawas, Brijendra ola

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Rajasthan Election Result 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 3 दिसंबर को मतगणना होगी। दोनों ही दल एग्जिट पोल के बाद अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। इधर सीएम गहलोत ने अपने निवास पर कई कांग्रेस उम्मीदवारों से मुलाकात की। तो वहीं वसुंधरा राजे भी लगातार सक्रिय हैं वह संघ नेताओं के अलावा राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर चुकी है। कुल मिलाकर चुनाव परिणाम से पहले दोनों ही बड़े नेता लगातार बैठकें कर रहे हैं।

इस बीच कई ऐसे सियासी मिथक भी हैं जो मतदान से पहले और बाद में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसा ही एक मिथक राजस्थान सरकार के परिवहन विभाग से जुड़ा है। आकड़ों की मानें तो पिछले 30 साल से सरकार में परिवहन विभाग संभालने वाला मंत्री अगला चुनाव नहीं जीत पाता है। गहलोत सरकार के वर्तमान कार्यकाल में प्रताप सिंह खाचरियावास और बृजेंद्र ओला परिवहन मंत्री रहे। दोनों नेता इस बार फिर चुनावी मैदान में हैं। प्रताप सिंह खाचरियावास जयपुर की सिविल लाइंस सीट से मैदान में हैं तो वहीं बृजेंद्र ओला झुंझुनूं सीट से प्रत्याशी हैं। ऐसे में चर्चा हैं कि ये दोनों मंत्री अपनी सीट बचा पाते हैं या नहीं।

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1993 से शुरू हुआ हार का सिलसिला

साल 1990 में भैंरोसिंह शेखावत सरकार में डाॅ. चंद्रभान और जगमाल यादव परिवहन मंत्री रहे। 1993 के चुनाव में दोनों नेता चुनाव हार गए। 1993 से शुरू हुआ हार का सिलसिला अभी भी जारी है। 1993 में भैंरोसिंह शेखावत एक बार फिर सीएम बने। उनकी सरकार में रोहिताश कुमार परिवहन मंत्री बने लेकिन 1998 में वे चुनाव हार गए। इसके बाद 1998 में गहलोत पहली बार सीएम बने। उनके कार्यकाल में बनवारी लाल बैरवा, केसी विश्नोई और छोगाराम परिवहन मंत्री रहे लेकिन 2003 के चुनाव में तीनों हार गए। इसके बाद 2003 में पहली बार वसुंधरा राजे सीएम बनी। उन्होंने यूनुस खान को परिवहन मंत्री बनाया 2008 वे चुनाव हार गए।

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2018 तक जारी है हार का सिलसिला

2008 के चुनाव में गहलोत एक बार फिर सीएम बने। उनके कार्यकाल में बृजकिशोर शर्मा और वीरेंद्र बेनीवाल ने परिवहन विभाग का जिम्मा संभाला 2013 में दोनों चुनाव हार गए। 2013 में एक बार फिर वसुंधरा सीएम बनीं। उनके कार्यकाल में यूनुस खान और बाबुलाल वर्मा परिवहन मंत्री रहे। 2018 के चुनाव में दोनों मंत्री चुनाव हार गए। वहीं वर्तमान गहलोत सरकार में प्रताप सिंह खाचरियावास और बृजेंद्र ओला फिर से चुनावी मैदान में हैं। दोनों के सामने बीजेपी ने नये चेहरे उतारे हैं। भाजपा ने सिविल लाइंस से गोपाल शर्मा और झुंझुनूं सीट से बबलू चौधरी को उतारा है। ऐसे में इस बार यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि दोनों चुनाव जीत पाते हैं या नहीं।

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